मुजफ्फरनगर में प्रदूषण का जानलेवा, AQI 278 पहुंचा, सांस लेना मुश्किल, मार्च में कोहरे की चादर और शून्य दृश्यता ने थामी रफ्तार
मुजफ्फरनगर में कुदरत और प्रदूषण के मेल ने जनजीवन को बुरी तरह अस्त-व्यस्त कर दिया है। बुधवार को जनपद का वायु गुणवत्ता सूचकांक यानी एक्यूआई उछलकर दो सौ अठहत्तर के स्तर पर पहुंच गया जिसके चलते लोगों का सांस लेना दूभर हो गया है। मार्च महीने के मध्य में जहां आमतौर पर गर्मी की दस्तक होती है वहीं मुजफ्फरनगर के आसमान में घने कोहरे और प्रदूषण की धुंध ने डेरा डाल रखा है। सुबह के वक्त दृश्यता का स्तर शून्य तक पहुंच गया जिसके कारण नेशनल हाईवे और शहर की मुख्य सड़कों पर वाहनों की रफ्तार थम गई।
ये भी पढ़ें नसीरपुर प्रकरण: सांसद हरेंद्र मलिक पहुंचे दोनों परिवारों के बीच, भाईचारा बनाए रखने की अपीलवायु प्रदूषण की इस गंभीर स्थिति ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। डॉक्टरों का कहना है कि हवा में घुले जहरीले कणों के कारण सांस के मरीजों और बुजुर्गों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। आंखों में जलन और गले में खराश की शिकायतें आम हो गई हैं। अचानक आए इस बदलाव ने मौसम वैज्ञानिकों को भी हैरत में डाल दिया है क्योंकि मार्च के महीने में इस तरह का घना कोहरा और प्रदूषण का स्तर सामान्य नहीं माना जाता।
ये भी पढ़ें मुजफ्फरनगर: किशोरी के अपहरण और बलात्कार के दोषी को 20 वर्ष की कठोर सजा, कोर्ट ने लगाया भारी जुर्मानाजिला प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से अभी तक इस स्थिति से निपटने के लिए कोई ठोस दिशा निर्देश जारी नहीं किए गए हैं लेकिन विशेषज्ञों ने लोगों को सलाह दी है कि वे सुबह और शाम के समय घरों से बाहर निकलने पर मास्क का प्रयोग जरूर करें। कोहरे के कारण सड़कों पर लाइट जलाकर वाहन चलाने की हिदायत दी गई है ताकि किसी अप्रिय हादसे को रोका जा सके। फिलहाल पूरे जनपद में धुंध की चादर लिपटी हुई है और सूरज की तपिश भी इस प्रदूषण को चीर पाने में नाकाम साबित हो रही है।
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