गैस किल्लत और कालाबाजारी से बढ़ी परेशानी, शादी वाले घर प्रभावित : पवन गुप्ता

कानपुर। गैस की किल्लत, कालाबाजारी और बढ़ती कीमतों के कारण आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लोग बेटियों की शादी जैसे कार्यक्रमों में भी करीब 2500 रुपये में गैस सिलेंडर खरीदने को मजबूर हैं और कई जगहों पर कालाबाजारी की स्थिति बन गई है। यह बातें सोमवार को कांग्रेस महानगर अध्यक्ष पवन गुप्ता ने कहीं।
ये भी पढ़ें जहां बंद होता है कांग्रेस वालों के दिमाग का ताला, वहां से शुरू होता है हमारा काम : प्रधानमंत्री मोदीकानपुर महानगर कांग्रेस के तत्वावधान में हुए इस प्रदर्शन का नेतृत्व महानगर अध्यक्ष पवन गुप्ता और कांग्रेस नेता कृष्णमणि देव सिंह उर्फ टिल्लू ठाकुर ने किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने हाथों में खाली बर्तन और पोस्टर लेकर गैस की किल्लत तथा बढ़ती कीमतों के खिलाफ आवाज उठाई। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि शहर में गैस सिलेंडर की किल्लत के कारण लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर गैस सिलेंडर की कालाबाजारी भी हो रही है, जिससे आम उपभोक्ताओं को अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।
महानगर अध्यक्ष ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों के कारण गैस की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं और अब गैस की किल्लत की स्थिति पैदा हो गई है। साहलग, होली मिलन और रमजान के माहौल में गैस की कमी से लोगों के घरों में परेशानी का माहौल है। उन्होंने मांग की कि प्रशासन शादी वाले घरों को गैस सिलेंडर की विशेष आपूर्ति सुनिश्चित करे और कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई करते हुए गैस की किल्लत की स्थिति को जल्द समाप्त किया जाए।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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