दिल्ली: क्राइम ब्रांच ने मुंडका में अवैध एलपीजी सिलेंडर जमाखोरी का भंडाफोड़ किया, 610 सिलेंडर बरामद

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की एंटी-एक्सटॉर्शन एंड किडनैपिंग सेल ने बाहरी दिल्ली के मुंडका इलाके में एक बड़ी अवैध एलपीजी सिलेंडर जमाखोरी और कालाबाजारी की साजिश का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने एक गोदाम से विभिन्न कंपनियों के कुल 610 भरे और खाली कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर बरामद किए हैं। ये सिलेंडर सरकारी नियमों और सुरक्षा मानदंडों का खुला उल्लंघन करते हुए जमा किए जा रहे थे। पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि मुंडका में खसरा संख्या 111/22 और 111, प्लॉट संख्या 9 पर स्थित 'गुरुजी इंडेन गैस सर्विस' नाम की जगह पर अवैध रूप से सिलेंडर जमा किए जा रहे हैं। इस सूचना पर एईकेसी की टीम ने इंस्पेक्टर अमित सोलंकी के नेतृत्व में छापेमारी की। टीम में एसआई राजबीर, एसआई परवीन, एएसआई रविंदर कुमार, एएसआई राजीव, एएसआई उमेश, एचसी अमित, एचसी मोहित, एचसी नितिन, एचसी रविंदर और एचसी दीपक कुमार शामिल थे।
इस कार्रवाई का पर्यवेक्षण एसीपी पंकज अरोड़ा और पुलिस उपायुक्त संजीव कुमार यादव ने किया। छापेमारी के दौरान गोदाम के अंदर इंडेन, भारत गैस और एचपी गैस के कमर्शियल सिलेंडर पाए गए। जांच में पता चला कि इस गोदाम को केवल इंडेन कंपनी के सिलेंडर बांटने का लाइसेंस मिला हुआ है। लेकिन, यहां भारत गैस और एचपी गैस के सिलेंडर भी अवैध रूप से रखे जा रहे थे। बरामदगी में इंडेन के 423 सिलेंडर (133 भरे और 290 खाली), भारत गैस के 92 सिलेंडर (17 भरे और 75 खाली) और एचपी गैस के 95 सिलेंडर (47 भरे, 27 खाली और 21 छोटे आकार के खाली) शामिल हैं। कुल मिलाकर 610 सिलेंडर और इंडेन के 26 लॉट भी मिले। पुलिस ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन से जानकारी ली तो पता चला कि 10 मार्च 2025 तक गोदाम में इंडेन के कोई सिलेंडर नहीं होने चाहिए थे, लेकिन यहां 133 भरे हुए सिलेंडर मौजूद थे। यह स्टॉक में बड़ी गड़बड़ी और अनियमितता की ओर इशारा करता है।
पुलिस का मानना है कि ऐसे सिलेंडरों की जमाखोरी अक्सर तब की जाती है जब बाजार में कमी होती है। फिर इन्हें कालाबाजारी करके ज्यादा कीमत पर बेचा जाता है, जिससे आम लोग और छोटे व्यवसाय प्रभावित होते हैं। साथ ही, इतने सारे ज्वलनशील सिलेंडरों का गलत तरीके से भंडारण आग लगने या विस्फोट का बड़ा खतरा पैदा करता है। खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारी विकास कुमार भी मौके पर मौजूद थे। उन्होंने पुष्टि की कि लाइसेंस की शर्तों के खिलाफ अन्य कंपनियों के सिलेंडर रखना गैरकानूनी है। इस मामले में आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 7 और भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(2) के तहत क्राइम ब्रांच पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज की गई है। गोदाम के मालिक छापेमारी के समय मौके पर नहीं थे और फिलहाल फरार हैं। पुलिस उनकी तलाश कर रही है। पुलिस ने कहा कि जांच जारी है। पूरी आपूर्ति श्रृंखला, अन्य लोगों की संलिप्तता और कालाबाजारी के नेटवर्क का पता लगाया जा रहा है। लोगों से अपील की गई है कि एलपीजी सिलेंडर खरीदते समय केवल अधिकृत डीलर से लें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत दें।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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