शिव भक्ति में डूबे कैलाश खेर, बाबा कालभैरव मंदिर में गाया 'बम बम लहरी' भजन

वाराणसी। देश के एक प्रसिद्ध पार्श्व गायक, संगीतकार और शिव भक्त कैलाश खेर सोमवार को उत्तर प्रदेश के वाराणसी में स्थित बाबा कालभैरव मंदिर पहुंचे, जहां उन्होंने काशी कोतवाल बाबा काल भैरव के दरबार में माथा टेककर आशीर्वाद लिया। पार्श्व गायक ने मंदिर में पूजा के समय अपना प्रसिद्ध शिव भजन 'बम बम लहरी' गाकर बाबा को समर्पित किया। इस दौरान वह माथे पर चंदन, गले में फूल और रुद्राक्ष की माला और हाथ में फूलों की टोकरी लेकर खड़े दिख रहे हैं। मंदिर प्रांगण में कैलाश खेर के साथ भक्तों में खासा उत्साह देखने को मिला, सभी बाबा की भक्ति में मगन दिखे।
वाराणसी स्थित बाबा कालभैरव मंदिर, भगवान शिव के उग्र रूप 'कालभैरव' को समर्पित एक प्राचीन मंदिर है, जिन्हें 'काशी का कोतवाल' माना जाता है। मंदिर को लेकर मान्यता है कि 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक बाबा विश्वनाथ के दर्शन से पहले भक्तों को कालभैरव की आज्ञा लेनी होती है, वरना उनकी यात्रा अधूरी मानी जाती है। बाबा कालभैरव मंदिर की खासियत है कि यहां शराब का प्रसाद चढ़ाया जाता है और यह मंदिर 17वीं सदी का माना जाता है, जो कि देश के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है। हर साल लाखों श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए यहां आते हैं।
वहीं, कैलाश खेर देश के एक प्रमुख और लोकप्रिय गायकों में से एक हैं, जो अपनी अनूठी और दमदार आवाज के साथ सूफी-लोक संगीत शैली के लिए जाने जाते हैं। गायक ने बॉलीवुड में 300 से अधिक गीतों में अपनी बेमिसाल आवाज दी है। कैलाश खेर के कुछ प्रमुख हिंदी गानों में 'अल्लाह के बंदे', 'संइया', 'तेरी दीवानी', 'या रब्बा', 'पिया घर आवेंगे', 'चांद सिफारिश', 'यूं ही चला चल', 'तौबा तौबा' आदि गाने शामिल हैं। अपनी उत्कृष्ट गायकी के लिए उन्हें 2017 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया। शिव भक्त कैलाश खेर हिंदी फिल्मों के गानों के साथ-साथ कई शिव भजन और स्तुति के लिए भी काफी लोकप्रिय हैं। उनमें से कुछ प्रमुख 'शिव शंभो', 'बम बम लहरी', 'आदियोगी', 'शिवोहम', 'अनादि अनंता', 'जय जय केदारा', 'कर्पूर गौरम', 'महामृत्युंजय मंत्र' और 'कौन है वो कहां से आया' आदि भजन शामिल हैं।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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