मेरठ नौचंदी में 'नारियल' फोड़ने पर फिर चर्चा में रालोद विधायक गुलाम मोहम्मद, पहले सोमेंद्र तोमर के साथ किया था हवन !

मेरठ -जनपद की सिवालखास सीट से रालोद (RLD) विधायक गुलाम मोहम्मद एक बार फिर अपनी 'नारियल फोड़ने' की परंपरा और सनातनी रीति-रिवाजों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने के कारण चर्चा का केंद्र बन गए हैं। इसे आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव की बिसात कहें या रालोद की भाजपा के साथ बदली हुई विचारधारा का असर, लेकिन उनके इस कदम ने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
विभिन्न विकास कार्यों के शिलान्यास और कार्यक्रमों के दौरान विधायक द्वारा नारियल फोड़कर और तिलक लगाकर शुरुआत करना, क्षेत्र के लोगों के बीच एक नई बहस को जन्म दे रहा है।
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रविवार को नौचंदी मेले के उद्घाटन के अवसर पर एक दिलचस्प नजारा देखने को मिला। डीएम डॉ. वीके सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष गौरव चौधरी और भाजपा विधायक अमित अग्रवाल के साथ गुलाम मोहम्मद भी मंच पर मौजूद थे।
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क्या हुआ: जब नारियल फोड़ने की रस्म शुरू हुई, तो थाल में तीन नारियल थे। वायरल हुए वीडियो में रालोद विधायक खुद थाली से पहले नारियल लेते दिख रहे हैं। मुस्लिम होने के नाते आयोजन में प्रबंध में लगे लोगों ने उन्हें नारियल नहीं दिया। दो नारियल डीएम और कैंट विधायक ने उठाए। तीसरा नारियल जिला पंचायत अध्यक्ष लेने ही वाले थे कि विधायक गुलाम मोहम्मद ने खुद आगे बढ़कर उसे उठा लिया।
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एक ही वार में फोड़ा: वहां मौजूद भीड़ यह देख हैरान रह गई कि विधायक ने पूरी धार्मिक रस्म के साथ एक ही बार में पत्थर पर पटककर नारियल फोड़ दिया।
पुरानी यादें ताज़ा: 'हवन' और 'टीके' पर हुआ था विवाद
यह पहली बार नहीं है जब गुलाम मोहम्मद हिंदू रीति-रिवाजों में शामिल हुए हों। इससे पहले भी उनकी ऊर्जा राज्यमंत्री सोमेंद्र तोमर के साथ हवन कुंड में आहुति देते हुए और माथे पर रोली का टीका लगवाते हुए तस्वीरें वायरल हुई थीं।
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ऑडियो क्लिप: उस समय एक ऑडियो क्लिप भी सामने आई थी जिसमें वे सफाई देते हुए कह रहे थे, "जो होता है दिल से होता है, किसी ने गर्दन पर तलवार नहीं रखी है।" * कमेंट बाजी: हालांकि, इंटरनेट मीडिया पर कुछ कट्टरपंथियों ने उन्हें 'मुनाफिक' तक कह डाला था, जिस पर विधायक ने दोटूक कहा था कि फोटो प्रसारित करने वाले लोग नासमझ हैं।
2027 की बिसात: रालोद का बदलता मिजाज?
गुलाम मोहम्मद फैज-ए-आम इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल रह चुके हैं और मंझे हुए राजनेता हैं। सपा से अपनी राजनीतिक पारी शुरू करने वाले गुलाम मोहम्मद अब रालोद (NDA गठबंधन) का हिस्सा हैं।
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राष्ट्रीय लोकदल के विधायक गुलाम मोहम्मद अपनी खास कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। हालिया दिनों में सिवालखास विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत विभिन्न सड़कों और सामुदायिक केंद्रों के उद्घाटन के दौरान उन्हें पूरी तरह हिंदू रीति-रिवाजों के साथ 'नारियल फोड़कर' परियोजनाओं की शुरुआत करते देखा गया। उनके इस 'सनातनी' अंदाज को लेकर क्षेत्र में दो तरह की चर्चाएं हैं—पहली यह कि वे 2027 की तैयारी के लिए सर्वसमाज को साधने की कोशिश कर रहे हैं, और दूसरी यह कि भाजपा-रालोद गठबंधन के बाद रालोद के नेताओं की कार्यशैली में व्यापक बदलाव आया है।
सियासी जानकारों का मानना है कि सिवालखास जैसी मिश्रित आबादी वाली सीट पर अपनी पकड़ मजबूत बनाए रखने के लिए विधायक गुलाम मोहम्मद 'नारियल पॉलिटिक्स' के जरिए बहुसंख्यक आबादी को यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि वे केवल एक समुदाय के नहीं, बल्कि सभी के प्रतिनिधि हैं। वहीं, विपक्षी खेमे में इसे भाजपा की विचारधारा के प्रति 'सॉफ्ट कॉर्नर' के रूप में देखा जा रहा है।
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