दरोगा भर्ती परीक्षा में 'पंडित' शब्द पर मचा बवाल: भर्ती बोर्ड ने बिठाई जांच, मंत्री और विधायकों ने खोला मोर्चा, शिवपाल यादव का BJP पर बड़ा हमला

लखनऊ/मेरठ। उत्तर प्रदेश पुलिस उपनिरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा के एक प्रश्न ने प्रदेश की राजनीति और सामाजिक समरसता को कटघरे में खड़ा कर दिया है। प्रश्न पत्र में 'अवसर के अनुसार बदलने वाले' व्यक्ति के विकल्प के रूप में 'पंडित' शब्द के इस्तेमाल पर ब्राह्मण समाज और जनप्रतिनिधियों ने कड़ा आक्रोश जताया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए भर्ती बोर्ड ने जांच के आदेश दे दिए हैं, वहीं एसटीएफ ने मथुरा से भर्ती के नाम पर ठगी करने वाले एक और आरोपी को दबोच लिया है।
क्या था विवादित प्रश्न?
14 मार्च को पहली पाली में आयोजित हिंदी खंड की परीक्षा में पूछा गया कि "अवसर के अनुसार बदल जाने वाला" के लिए एक शब्द क्या होगा? इसके विकल्पों में 'अवसरवादी', 'निष्कपट', 'सदाचारी' के साथ 'पंडित' शब्द को शामिल किया गया था। 'पंडित' (विद्वान/ज्ञानी) शब्द को नकारात्मक अर्थ (अवसरवादी) से जोड़ने पर भारी विरोध शुरू हो गया है।
भर्ती बोर्ड और STF का एक्शन
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भर्ती बोर्ड का पक्ष: बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक ने स्पष्ट किया कि प्रश्न पत्र बाहरी गोपनीय संस्थाएं तैयार करती हैं। बोर्ड के किसी अधिकारी को इसे पहले देखने की अनुमति नहीं होती। इस 'विवादास्पद' प्रश्न की जांच शुरू कर दी गई है और दोषी पेपर सेटर/संस्था को ब्लैकलिस्ट कर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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STF की बड़ी कामयाबी: मेरठ एसटीएफ ने मथुरा के राया क्षेत्र से अनुज कुमार को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह दरोगा भर्ती पास कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से 22-22 लाख रुपये वसूल रहा था। मुख्य आरोपी गोपाल रावत अभी फरार है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान अनुज कुमार निवासी हवेली, थाना राया, जनपद मथुरा के तौर पर हुई है। एसटीएफ ने इसे बीती रात मथुरा जिले के थाना राया क्षेत्र के मोहल्ला शिवपुरी स्थित रजनी लाइब्रेरी के पास से गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के दौरान आरोपी के पास से एक मोबाइल फोन, भर्ती परीक्षा के दो एडमिट कार्ड, अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के चार एडमिट कार्ड, व्हाट्सएप चैट के स्क्रीनशॉट और सामान्य ज्ञान की एक पुस्तक बरामद हुई है।
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पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह खुद भी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करता है। इसी दौरान उसकी मुलाकात गोपाल रावत नाम के व्यक्ति से हुई थी। गोपाल रावत अभ्यर्थियों को दरोगा भर्ती परीक्षा पास कराने का झांसा देकर उनसे करीब 22 लाख रुपये तक की मांग करता था। अनुज कुमार का काम ऐसे अभ्यर्थियों को तलाशना और उन्हें गोपाल रावत से मिलवाना था।
एसटीएफ की कार्रवाई के बाद आरोपी के खिलाफ थाना राया में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। वहीं गिरोह का मुख्य आरोपी गोपाल रावत अभी फरार है, जिसकी तलाश की जा रही है।
सियासी पारा हाई: "ब्राह्मणों का अपमान कर रही BJP"
विवादित प्रश्न को लेकर सरकार के भीतर और बाहर दोनों तरफ से तीखी प्रतिक्रियाएं आईं:
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योगेंद्र उपाध्याय (उच्च शिक्षा मंत्री): उन्होंने इसे 'मानसिक विकृति' बताया और कहा कि सामाजिक समरसता बिगाड़ने वाले पेपर सेटर को चिन्हित कर सख्त सजा दी जाए। रविवार को एक बयान जारी कर उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि परीक्षा में पूछे गए प्रश्न “अवसर के अनुसार बदलने वाला” के लिए दिए गए विकल्पों में ‘पंडित’ शब्द को शामिल करना न तो उचित है और न ही इसका प्रश्न से कोई तालमेल है। ऐसा कृत्य किसी मानसिक विकृति से ग्रसित पेपर सेटर द्वारा जानबूझकर किया गया प्रतीत होता है, जिसका उद्देश्य समाज में समरसता को बिगाड़ना है।
मंत्री ने कहा कि इस तरह की हरकतें न केवल सामाजिक समरसता को प्रभावित करती हैं, बल्कि समाज के एक वर्ग की भावनाओं को भी आहत करती हैं। किसी भी जाति, वर्ग या परंपरा के प्रतीक शब्दों का अपमानजनक संदर्भ में उपयोग किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। -
उन्होंने कहा कि पेपर सेटिंग की प्रक्रिया अत्यंत गोपनीय होती है, इसलिए ऐसे असामाजिक तत्वों को चिन्हित करना कठिन नहीं होना चाहिए। दोषी पेपर सेटर की पहचान कर उसके खिलाफ जल्द से जल्द सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति किसी समाज या वर्ग के प्रति अपमानजनक टिप्पणी करने से पहले सौ बार सोचे।
योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि हाल ही में एक फिल्म के नाम को लेकर भी इसी तरह की आपत्तिजनक स्थिति सामने आई थी। ऐसे मामलों में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होना जरूरी है। -
रमेश चंद्र मिश्रा (भाजपा विधायक): जौनपुर के विधायक ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि विद्वत्ता के प्रतीक 'पंडित' शब्द को नकारात्मक अर्थ देना अक्षम्य है।विधायक ने अपने पत्र में कहा है कि 14 मार्च को आयोजित उत्तर प्रदेश पुलिस उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा के हिंदी खंड में एक अत्यंत आपत्तिजनक एवं संवेदनशील प्रश्न पूछा गया, जिससे समाज में आक्रोश की स्थिति उत्पन्न हो गई है। प्रश्न में अवसर के अनुसार बदल जाने वाले व्यक्ति के लिए एक शब्द पूछते हुए विकल्प में "पंडित" , अवसरवादी, निष्कपट और सदाचारी दिए गए थे। विधायक ने कहा कि यह प्रश्न गलत तरीके से तैयार किया गया है। अवसर के अनुसार बदल जाने वाले व्यक्ति को अवसरवादी कहा जाता है, लेकिन विकल्प में पंडित शब्द को शामिल करना एक विशेष समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाला है। उन्होंने कहा कि पंडित शब्द विद्वान, ज्ञानी और धार्मिक सम्मान से जुड़ा होता है, इसे नकारात्मक अर्थ से जोड़ना पूरी तरह अनुचित और असंवेदनशील है।
उन्होने इस मामले में कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जिसने यह प्रश्नपत्र तैयार किया है, वह अधिकारी कुंठित और विकृत मानसिकता का व्यक्ति होगा। एक पूरे समाज को आघात पहुंचाने का कार्य किया गया है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में उन्होंने संबंधित अधिकारी के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग करते हुए मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है। साथ ही सरकार को बदनाम करने वाले ऐसे कालनेमियों को चिन्हित किया जा रहा है। पत्र में उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के प्रश्न परीक्षा की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हैं और इससे सामाजिक सद्भाव प्रभावित होने की आशंका रहती है। विधायक ने प्रश्न तैयार करने वाली समिति के खिलाफ तत्काल विभागीय जांच कर कठोर कार्रवाई करने की मांग की है, साथ ही भविष्य में परीक्षा प्रश्नपत्र तैयार करते समय संवेदनशीलता, निष्पक्षता और सामाजिक सद्भाव का विशेष ध्यान रखने के निर्देश देने की भी मांग की है। -
शिवपाल यादव (सपा महासचिव): शिवपाल यादव ने इटावा में बड़ा बयान देते हुए कहा, "पिछले 6 महीनों से भाजपा ब्राह्मणों को नीचा दिखाने और अपमानित करने में जुटी है। अब ब्राह्मण वर्ग भाजपा से अलग होकर अपनी राह बनाएगा।" इटावा मुख्यालय के कृष्णा गार्डन में काशीराम जयंती समारोह में शामिल होने आए शिवपाल ने उप्र दरोगा पुलिस परीक्षा में पंडित नाम से पूछे गए सवाल को लेकर कहा “ पिछले 6 माह से हम देख रहे हैं कि उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ब्राह्मणों को अपमानित करने और नीचा दिखाने में जुटी हुई है।”
उन्होने इशारा किया कि ब्राह्मण वर्ग कहीं ना कहीं समाज में एक अलग पहचान के लिए जाना जाता है लेकिन जिस तरह से पिछले छह माह से भाजपा में ब्राह्मणों को अपमानित किया जा रहा है कि इससे निश्चित है कि ब्राह्मण वर्ग भाजपा से अलग होकर के अपनी एक राह बनायेगा।
श्री यादव ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी भगवान राम का धोखा देकर अपमान करने में जुटी हुई है। भगवान राम के राज में कभी भेदभाव नहीं था लेकिन भाजपा के राज्य में हर वर्ग में भेदभाव ओर झूठ का बोल बाला दिखाई दे रहा है। उन्होंने अपनी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया है कि बहुजन समाज से जुड़े हुए लोगों के बीच जाएं और उनको सरकार की करगुजारियां बात करके अपने पक्ष में खड़े करने का काम करें।
उन्होंने कहा कि पिछड़ी जाति बहुजन समाज और सभी पीडीए वर्ग से जुड़े हुए लोगों को एकजुट करके 2027 में समाजवादी सरकार बनाकर अखिलेश यादव को मुख्यमंत्री बनाएं। उन्होंने कहा कि बहुजन जननायक काशीराम के जन्म दिवस पर हम सभी नमन करते हैं और याद करते है। जीवन में।बहुजन समाज को नया मुकाम देने को कांशीराम जी ने बहुत बड़ा संघर्ष किया है।
उन्होंने कहा कि बाबा साहब ने बहुत अच्छा संविधान बनाया जिसका फायदा हर वर्ग को मिल रहा था लेकिन केंद्र राज्य में भाजपा की सरकार बनते है संविधान को तोड़ा जाना शुरू कर दिया गया। संविधान के अनुरुप देशवासियों को बहुत कुछ मिलना चाहिए था लेकिन भाजपा राज में संविधान के अनुरूप कोई भी कार्य नहीं हो रहा है।
श्री यादव ने कहा कि भाजपा तो भगवान राम को भी धोखा देना का काम करते हैं सबकी दुर्दशा हो रही है, दस साल में सबको लूट लिया है। जीएसटी के नाम से सबको लूटने मे भाजपा लगी हुईं है। इटावा बरेली हाइवे से टोल वसूला जा रहा है।बुंदेलखंड हाईवे की जर्जरता किसी से छुपी नहीं है। सिंचाई विभाग ओर पीडब्ल्यूडी विभाग में काफी घोटाला हुआ है।
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