योगी सरकार का बड़ा कदम: सरयू नहर परियोजना के विस्तार से पूर्वी यूपी के किसानों की बदलेगी तकदीर
पूर्वी उत्तर प्रदेश में सिंचाई व्यवस्था का कायाकल्प, 14.04 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचित करने का लक्ष्य
लखनऊ-
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार 'हर खेत को जल' के संकल्प को साकार करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग द्वारा सरयू नहर परियोजना का व्यापक विस्तार किया जा रहा है, जिससे पूर्वी उत्तर प्रदेश के किसानों को सीधा लाभ मिलेगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के अनुरूप, इस राष्ट्रीय परियोजना के माध्यम से कुल 14.04 लाख हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में नए कुलाबों के निर्माण और नहरों के गैप्स को भरकर सिंचाई क्षमता में ऐतिहासिक वृद्धि की जा रही है, जिससे न केवल कमांड एरिया बढ़ेगा बल्कि किसानों की उत्पादकता और आय में भी भारी इजाफा होगा।
ये भी पढ़ें Samajwadi Party का हजरतगंज चौराहे पर प्रदर्शन,महंगाई और गैस किल्लत को लेकर सड़क पर उतरे नेता2026-27 में पूरा होगा 1655 कुलाबों का निर्माण
ये भी पढ़ें मुजफ्फरनगर में MDA का महा-अभियान, 110 बीघा में विकसित हो रही अवैध कॉलोनियों पर चला 'बुलडोजर'सरयू नहर परियोजना के अंतर्गत पूर्वी यूपी के नौ जिलों में कुल 9000 कुलाबों के निर्माण का लक्ष्य है। इनमें से 7345 कुलाबों का काम पूरा हो चुका है, जबकि शेष 1655 कुलाबों का निर्माण कार्य 2026-27 तक पूरा कर लिया जाएगा। इस पहल से लगभग 66,200 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि सिंचित होगी, जिसका लाभ रबी और खरीफ दोनों फसलों को मिलेगा। इसके साथ ही, 14 प्रमुख नहर गैप्स को भरने का काम भी युद्धस्तर पर जारी है, जिससे 27,863 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई सुविधाओं का विस्तार सुनिश्चित होगा।
प्रेशर सिंचाई प्रणाली से बढ़ेगा 1.31 लाख हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र
कम पानी वाले क्षेत्रों में सिंचाई सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश सरकार केंद्र के जल शक्ति मंत्रालय के सहयोग से 'प्रेशर सिंचाई परियोजना' (Pressure Irrigation Project) पर काम कर रही है। अप्रैल 2025 से पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू हुई इस तकनीक के जरिए 1.31 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त सिंचित क्षेत्र का लक्ष्य रखा गया है। सरकार के प्रवक्ता के अनुसार, कुलाबा निर्माण, गैप फिलिंग और प्रेशर सिंचाई के संयुक्त प्रयासों से पूर्वांचल के किसानों को सिंचाई के संकट से मुक्ति मिलेगी और क्षेत्र में सतत कृषि विकास सुनिश्चित होगा।
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