मुजफ्फरनगर: गैस के लिए त्राहि-त्राहि, तपती धूप में रोजेदारों की कतारें और कालाबाजारी के आरोप
मुजफ्फरनगर। शहर में रसोई गैस की भारी किल्लत अब जनता के सब्र का बांध तोड़ रही है। गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से ही लगने वाली उपभोक्ताओं की लंबी कतारें और वहां होने वाला हंगामा प्रशासन के सुचारू आपूर्ति के दावों की पोल खोल रहा है। शुक्रवार को कच्ची सड़क स्थित सरवट इंडेन सेवा के कार्यालय पर उस समय भारी बवाल हो गया जब घंटों लाइन में लगने के बाद भी उपभोक्ताओं के हाथ खाली रहे। आक्रोशित लोगों ने एजेंसी प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
हॉकर्स पर ब्लैक में सिलेंडर बेचने का आरोप
प्रदर्शन कर रहे उपभोक्ताओं ने गैस एजेंसी और बिचौलियों की मिलीभगत के गंभीर आरोप लगाए हैं। उपभोक्ता साजिद हसन का कहना है कि एक तरफ सरकार ने गैस के दाम साठ रुपये बढ़ा दिए हैं, वहीं दूसरी ओर एजेंसी बुकिंग न होने का बहाना बना रही है। सबसे चौंकाने वाला आरोप यह है कि आम जनता के लिए सिलेंडर उपलब्ध नहीं है, लेकिन हॉकर्स के पास ब्लैक में बेचने के लिए पर्याप्त स्टॉक है। आरोप है कि नौ सौ रुपये का सरकारी सिलेंडर पंद्रह सौ से दो हजार रुपये तक में खुलेआम बेचा जा रहा है।
ये भी पढ़ें मुज़फ्फरनगर के छपार टोल प्लाजा पर नशे में धुत कर्मचारी ने शिफ्ट इंचार्ज को दी जान से मारने की धमकीरमजान और भीषण गर्मी ने बढ़ाई मुश्किलें
किल्लत की मार झेल रही महिला उपभोक्ता फराह ने बताया कि रमजान के पाक महीने में रोजे की हालत में कड़ी धूप में खड़े रहना मुश्किल हो रहा है। ऑनलाइन पोर्टल और सर्वर डाउन होने के कारण बुकिंग नहीं हो पा रही है और जब उपभोक्ता दफ्तर पहुंचते हैं, तो कर्मचारी कल आने की बात कहकर उन्हें टाल देते हैं। घर का चूल्हा ठंडा पड़ने से लोगों में प्रशासन के प्रति गहरा गुस्सा है।
एजेंसी ने दी सफाई, पैनिक बुकिंग को बताया कारण
तमाम आरोपों के बीच सरवट इंडेन सेवा के संचालक आलम ने कालाबाजारी की बात से साफ इनकार किया है। उनका तर्क है कि जनता में डर के कारण पैनिक बुकिंग बढ़ गई है। जिन लोगों ने हाल ही में सिलेंडर लिया है, वे भी दोबारा बुकिंग की कोशिश कर रहे हैं। एक साथ हजारों लोगों द्वारा सिस्टम का उपयोग करने के कारण सर्वर स्लो हो गया है। एजेंसी मालिक का दावा है कि स्थिति जल्द ही सामान्य हो जाएगी।
प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई का इंतजार
शहर में गैस को लेकर मचे इस हाहाकार के बावजूद जिला पूर्ति विभाग की ओर से अब तक कोई बड़ी जमीनी कार्रवाई देखने को नहीं मिली है। उपभोक्ताओं की मांग है कि हॉकर्स की जांच की जाए और कृत्रिम किल्लत पैदा करने वालों पर सख्त एक्शन लिया जाए ताकि आम आदमी को राहत मिल सके।
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