ईडी की बड़ी कार्रवाई: अनिल अंबानी समूह की 1885 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क
नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अनिल अंबानी के रिलायंस समूह से जुड़ी कंपनियों की करीब 1,885 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क (प्रोविजनली अटैच) किया है। ईडी ने बुधवार को जारी बयान में यह जानकारी दी।
ईडी ने बताया कि इससे पहले भी आरसीओएम, आरसीएफएल और आरएचएफएल से जुड़े बैंक फ्रॉड मामलों में 10,117 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं। अब तक समूह से जुड़ी कुल कुर्की राशि करीब 12,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है। जांच में ईडी ने पाया है कि आरसीओएम, आरसीएफएल, आरएचएफएल, रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और रिलायंस पावर लिमिटेड सहित अनिल अंबानी समूह की विभिन्न कंपनियों द्वारा सार्वजनिक धन की धोखाधड़ी कर हेराफेरी की गई। ईडी के मुताबिक, वर्ष 2017 से 2019 के बीच यस बैंक ने आरएचएफएल में 2,965 करोड़ रुपये और आरसीएफएल में 2,045 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जो दिसंबर 2019 तक एनपीए (गैर-निष्पादित संपत्ति) बन गया। उस समय आरएचएफएल पर 1,353.50 करोड़ रुपये और आरसीएफएल पर 1,984 करोड़ रुपये बकाया थे।
जांच में यह भी सामने आया कि आरएचएफएल और आरसीएफएल को 11,000 करोड़ रुपये से अधिक का सार्वजनिक धन प्राप्त हुआ। यस बैंक द्वारा निवेश से पहले, बैंक को रिलायंस निप्पॉन म्यूचुअल फंड से बड़ी रकम मिली थी। सेबी के नियमों के तहत हितों के टकराव के कारण रिलायंस निप्पॉन म्यूचुअल फंड सीधे अनिल अंबानी समूह की वित्तीय कंपनियों में निवेश नहीं कर सकता था, इसलिए सार्वजनिक धन को यस बैंक के माध्यम से घुमावदार रास्ते से इन कंपनियों तक पहुंचाया गया। ईडी ने इस मामले में सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर भी जांच शुरू की है, जो विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज की गई है। जांच में सामने आया है कि 2010-2012 के बाद से आरसीओएम और उसकी समूह कंपनियों ने घरेलू और विदेशी बैंकों से बड़े पैमाने पर कर्ज लिया, जिसमें से 40,185 करोड़ रुपये अब भी बकाया हैं।
नौ बैंकों ने इन कर्ज खातों को धोखाधड़ी घोषित किया है। ईडी के अनुसार, एक बैंक से लिए गए कर्ज का इस्तेमाल दूसरे बैंकों के कर्ज चुकाने, संबंधित पक्षों को धन हस्तांतरण और म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए किया गया, जो कर्ज की शर्तों का उल्लंघन है। जांच में यह भी सामने आया कि 13,600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि कर्ज को ‘एवरग्रीन’ करने में, 12,600 करोड़ रुपये से अधिक संबंधित पक्षों को देने में और 1,800 करोड़ रुपये से अधिक एफडी/म्यूचुअल फंड में निवेश किए गए, जिन्हें बाद में समूह कंपनियों में वापस भेज दिया गया। ईडी ने यह भी बताया कि बिल डिस्काउंटिंग का बड़े पैमाने पर दुरुपयोग कर धन को संबंधित पक्षों तक पहुंचाया गया और कुछ कर्ज राशि को विदेशों में भेजा गया। मामले में आगे की जांच अभी जारी है।
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हमें फॉलो करें और हमसे जुड़े रहें।
(Follow us on social media platforms and stay connected with us.)
Youtube – https://www.youtube.com/@RoyalBulletinIndia
Facebook – https://www.facebook.com/royalbulletin
Instagram: https://www.instagram.com/royal.bulletin/
Twitter – https://twitter.com/royalbulletin
Whatsapp – https://chat.whatsapp.com/Haf4S3A5ZRlI6oGbKljJru
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
रविता ढांगे 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और डिजिटल न्यूज़ डेस्क के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने अपने पेशेवर करियर की शुरुआत 'समाचार टुडे' से की थी, जहाँ उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों और न्यूज़ ऑपरेशन्स के बुनियादी सिद्धांतों को सीखा।
रविता ढांगे की सबसे बड़ी विशेषता उनकी मजबूत तकनीकी पृष्ठभूमि है; उन्होंने BCA, PGDCA और MCA (Master of Computer Applications) जैसी उच्च डिग्रियां प्राप्त की हैं। उनकी यह तकनीकी विशेषज्ञता ही 'रॉयल बुलेटिन' को डिजिटल रूप से सशक्त बनाती है। वर्ष 2022 से संस्थान का अभिन्न हिस्सा रहते हुए, वे न केवल खबरों के संपादन में निपुण हैं, बल्कि न्यूज़ एल्गोरिदम और डेटा मैनेजमेंट के जरिए खबरों को सही दर्शकों तक पहुँचाने में भी माहिर हैं। वे पत्रकारिता और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के बेहतरीन संगम का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिससे पोर्टल की डिजिटल रीच और विश्वसनीयता में निरंतर वृद्धि हो रही है।

टिप्पणियां