नई सीपीआई सीरीज का कमाल: 4% से नीचे आ सकती है महंगाई दर, खर्च की दिखेगी 'साफ तस्वीर'
नई दिल्ली। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) की नई सीरीज में भी महंगाई दर 4 प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे रहने की उम्मीद है। यह नई सीरीज भारत में लोगों के बदलते खर्च के तरीके को बेहतर ढंग से दिखाएगी और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार नीति बनाने में मदद करेगी। शुक्रवार को जारी बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट में यह बात कही गई है। बीओबी की इस रिपोर्ट में कहा गया है कि मुख्य महंगाई (कोर इंफ्लेशन) पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि सोना-चांदी जैसी कीमती धातुओं की कीमतों में बढ़ोतरी का खतरा बना रहता है।
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हालांकि, नई सीरीज में अलग-अलग चीजों का संतुलित महत्व (वेटेज) रखा गया है, जिससे महंगाई 4+/-2 प्रतिशत के दायरे में रहने की उम्मीद है। बैंक ने कहा कि नई सीरीज से महंगाई का मुख्य आंकड़ा ज्यादा सही और आधुनिक होगा, जो मौद्रिक नीति (ब्याज दर जैसे फैसले) के लिए महत्वपूर्ण है। नई सीरीज में खाने-पीने की चीजों के मौसमी उतार-चढ़ाव को बेहतर तरीके से शामिल किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आगे चलकर सरकार के आपूर्ति से जुड़े कदम खाद्य महंगाई को नियंत्रित रखने में मदद करेंगे। बैंक ऑफ बड़ौदा के जरूरी वस्तु सूचकांक (ईसीआई) के अनुसार, फरवरी 2026 के पहले 11 दिनों में जरूरी चीजों की कीमतों में सालाना आधार पर 0.4 प्रतिशत की गिरावट देखी गई। केवल कुछ खाद्य तेल और दालों को छोड़कर बाकी खाद्य पदार्थों की कीमतें अभी नियंत्रण में हैं।
नई सीरीज में पहले की तुलना में खाद्य महंगाई में बदलाव देखा गया है। पुरानी सीरीज में पिछले सात महीनों से खाद्य महंगाई घट रही थी, लेकिन नई सीरीज में इसमें हल्की बढ़ोतरी दिखी है। बैंक ने इस बदलाव का कारण सीपीआई की सबसे अस्थिर टोकरी, यानी टमाटर, प्याज और आलू जैसी सब्जियों के भार में कमी को बताया है। नई सीरीज में वस्तुओं की संख्या 299 से बढ़ाकर 358 कर दी गई है। इसमें 1,465 ग्रामीण और 1,395 शहरी बाजारों के साथ 12 ऑनलाइन बाजारों को भी शामिल किया गया है, और सीपीआई बास्केट में खाद्य पदार्थों का भार 45.8 प्रतिशत से घटाकर 40.1 प्रतिशत कर दिया गया है। वहीं ग्रामीण आवास, ऑनलाइन मीडिया और स्ट्रीमिंग सेवाएं, मूल्यवर्धित डेयरी उत्पाद, जौ, पेनड्राइव और एक्सटर्नल हार्ड डिस्क जैसी चीजें जोड़ी गई हैं। वहीं रेडियो, टेप रिकॉर्डर, डीवीडी प्लेयर और पुराने कपड़े जैसी पुरानी चीजें हटा दी गई हैं।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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