राज्यसभा में गूँजा ऐतिहासिक धरोहरों का मुद्दा: स्मारकों में तोड़फोड़ और अपवित्रता पर सदस्यों ने जताई गहरी चिंता
ये भी पढ़ें मुज़फ्फरनगर में शादी की खुशियां मातम में बदली: साले की शादी में जा रहे युवक की सड़क हादसे में मौतनई दिल्ली। राज्यसभा सदस्य मीनाक्षी जैन ने शुक्रवार को देश की अमूल्य धरोहरों की रक्षा का महत्वपूर्ण विषय सदन में उठाया। उन्होंने कहा कि सदन का ध्यान देश की अमूल्य धरोहर स्थलों पर बढ़ती हुई तोड़फोड़ और अपवित्रता के गंभीर खतरे की ओर आकर्षित किया। उन्होंने बताया कि हाल के दिनों में ऐसी घटनाओं में वृद्धि हुई है, जो अत्यंत चिंताजनक है।
मीनाक्षी जैन ने कहा कि हम्पी, जो 14वीं से 16वीं शताब्दी के बीच शासन करने वाले महान विजयनगर साम्राज्य की राजधानी था, हमारी समृद्ध सभ्यतागत विरासत का प्रतीक है। लगभग 16 वर्ग मील में फैला यह नगर मध्यकालीन विश्व के सबसे बड़े नगरों में से एक माना जाता था। अनेक विदेशी यात्रियों ने हम्पी की भव्यता और समृद्धि का वर्णन किया है। इस स्थल पर अनेक मंदिर, किले, मंडप, स्तंभयुक्त सभागार और अन्य भव्य संरचनाएं स्थित हैं। वर्ष 1986 में हम्पी को यूनेस्को की ओर से विश्व धरोहर स्थल घोषित किया गया।
उन्होंने बताया कि यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ पर्यटक, इस स्थल के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व से अनभिज्ञ होकर, गैर-जिम्मेदाराना और विनाशकारी कृत्य कर रहे हैं। हाल ही में कुछ व्यक्तियों ने एक मंदिर के बाहर स्थित एक विशाल स्तंभ को तोड़ दिया, जबकि उनका एक साथी इस घटना का वीडियो बना रहा था। आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने घोषणा की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मंदिरों के स्तंभों की सुरक्षा को और मजबूत किया जाएगा। यद्यपि संरचनात्मक सुदृढ़ीकरण आवश्यक है, किंतु जागरूकता और संवेदनशीलता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।
राज्यसभा सांसद ने एक और उदाहरण देते हुए कहा, "इसी प्रकार की घटनाएं अन्य स्थानों से भी सामने आई हैं। मध्य प्रदेश स्थित उदयगिरि गुफाएं गुप्तकालीन धरोहर हैं। यहां भगवान विष्णु के वराह अवतार की देश की सबसे बड़ी एकाश्म प्रतिमा स्थित है, जिस पर अत्यंत सूक्ष्म और सुंदर नक्काशी की गई है। यह प्रतिमा 5वीं-6वीं शताब्दी की मानी जाती है। हाल ही में एक पर्यटक जूते पहनकर प्रतिमा के चबूतरे पर चढ़ गया और अपने मित्रों से फोटो खिंचवाई। उसने प्रतिमा पर चढ़ने का भी प्रयास किया। पूछने पर उन्होंने कहा कि उन्हें इस स्थल के ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की जानकारी नहीं थी। वे इसे केवल घूमने-फिरने का स्थान समझ रहे थे।"
मीनाक्षी जैन ने कहा कि ऐसी घटनाएं स्पष्ट रूप से दर्शाती हैं कि पर्यटकों के बीच जागरूकता और संवेदनशीलता की कमी है। यह जरूरी है कि आगंतुकों को उन स्थलों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व के बारे में उचित जानकारी दी जाए। हमारी धरोहर का संरक्षण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। यह विचार किया जा सकता है कि इन स्थलों पर तैनात सुरक्षाकर्मी और प्रशिक्षित गाइड आगंतुकों को जागरूक करने में सक्रिय भूमिका निभाएं। साथ ही, स्पष्ट सूचना-पट्ट, प्रारंभिक मार्गदर्शन और तोड़फोड़ के मामलों में कड़े दंड का प्रावधान भी प्रभावी सिद्ध हो सकता है।
उन्होंने सदन में कहा कि हमारे ये धरोहर स्थल केवल पत्थर और संरचनाएं नहीं हैं, वे हमारे इतिहास, संस्कृति और पहचान के जीवंत प्रमाण हैं। इन्हें भावी पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हमें फॉलो करें और हमसे जुड़े रहें।
(Follow us on social media platforms and stay connected with us.)
Youtube – https://www.youtube.com/@RoyalBulletinIndia
Facebook – https://www.facebook.com/royalbulletin
Instagram: https://www.instagram.com/royal.bulletin/
Twitter – https://twitter.com/royalbulletin
Whatsapp – https://chat.whatsapp.com/Haf4S3A5ZRlI6oGbKljJru
लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

टिप्पणियां