Mahashivratri 2026: मंदिर नहीं जा पा रहे हैं तो घर पर ऐसे करें शिव पूजा, अमृत मुहूर्त में अभिषेक से मिलेगा अपार आशीर्वाद और पूरी होंगी मनोकामनाएं
अगर आप इस बार महाशिवरात्रि पर किसी कारणवश मंदिर या शिवालय नहीं जा पा रहे हैं तो बिल्कुल चिंता न करें। भगवान शिव केवल मंदिरों में ही नहीं बल्कि सच्ची श्रद्धा और पवित्र मन में भी निवास करते हैं। यदि आपका मन साफ है और विश्वास अटूट है तो घर पर की गई पूजा भी उतना ही पुण्य देती है जितना मंदिर में की गई आराधना।
घर पर ऐसे करें भगवान शिव का अभिषेक
सबसे पहले प्रातः काल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। अपने घर के पूजा स्थान को अच्छी तरह साफ करें और वहां शिवलिंग या भगवान शिव की तस्वीर स्थापित करें। पूजा की शुरुआत दीपक जलाकर करें और फिर श्रद्धा के साथ भगवान शिव का जल दूध या पंचामृत से अभिषेक करें।
अभिषेक करते समय ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करते रहें। यह मंत्र अत्यंत शक्तिशाली माना जाता है और मन को शांति और ऊर्जा प्रदान करता है। यदि संभव हो तो 108 बेलपत्र भगवान शिव को अर्पित करें। बेलपत्र और धतूरा भगवान शिव को अत्यंत प्रिय माने जाते हैं और इनसे पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है।
रात्रि के प्रहर का विशेष महत्व
पंडित दामोदर जोशी के अनुसार महाशिवरात्रि का वास्तविक महत्व रात्रि में ही माना जाता है। शिवरात्रि का अर्थ ही है शिव की रात्रि। प्राचीन समय में अधिकतर शुभ कार्य और विवाह भी रात्रि लग्न में होते थे क्योंकि रात्रि को साधना के लिए श्रेष्ठ समय माना गया है।
इस दिन रात्रि के चार प्रहरों में पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। प्रथम प्रहर शाम 6 बजे से रात 9 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। द्वितीय प्रहर रात 9 बजकर 14 मिनट से 12 बजकर 27 मिनट तक है। तृतीय प्रहर रात 12 बजकर 27 मिनट से प्रातः 3 बजकर 42 मिनट तक रहेगा। इन प्रहरों में जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करना अत्यंत शुभ माना गया है।
महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी इस रात विशेष फल देता है
ॐ त्र्यंबकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्
इस मंत्र के नियमित जाप से भय और कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है।
अमृत मुहूर्त में करें विशेष अभिषेक
प्रातः 5 बजे से 11 बजे तक का समय अमृत मुहूर्त माना गया है। इस दौरान रुद्राभिषेक और जलाभिषेक करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। सुबह 8 बजकर 24 मिनट से 9 बजकर 48 मिनट तक भी शुभ समय बताया गया है। इस दौरान गन्ने का रस दही घी शहद और दूध से अभिषेक किया जाता है जिसे पंचामृत अभिषेक कहा जाता है।
अंत में यह याद रखें कि भगवान शिव भाव के भूखे हैं। चाहे आप मंदिर जाएं या घर पर पूजा करें यदि आपकी भक्ति सच्ची है तो भगवान शिव अवश्य प्रसन्न होंगे और आपकी मनोकामनाएं पूर्ण करेंगे।
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लेखक के बारे में
युवा और ऊर्जावान पत्रकार चयन प्रजापत 'रॉयल बुलेटिन' के लिए मध्य प्रदेश के इंदौर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। आपकी मुख्य विशेषज्ञता खेल (Sports), कृषि (Farming) और ऑटोमोबाइल (Automobile) सेक्टर में है। चयन प्रजापत इन विषयों की तकनीकी समझ के साथ-साथ ज़मीनी हकीकत को अपनी खबरों में पिरोने के लिए जाने जाते हैं। इंदौर और मालवा क्षेत्र की खबरों के साथ-साथ ऑटोमोबाइल और खेल जगत की विशेष कवरेज के लिए आप रॉयल बुलेटिन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

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