हवन की समाप्ति के बाद अचानक अग्नि का प्रज्वलित होना: दैवीय चमत्कार या शुभ संकेत ? जानिए क्या कहता है शास्त्र
गृह शांति अनुष्ठान के बाद हवन कुंड में खुद उठी ज्वाला; जानिए पितरों के आशीर्वाद और नकारात्मकता के नाश का यह अद्भुत रहस्य
सनातन धर्म में हवन और यज्ञ को शुद्धिकरण का सबसे बड़ा माध्यम माना गया है। अक्सर घरों में सुख-शांति, समृद्धि और संतान के कल्याण के लिए गृह शांति के पाठ और हवन कराए जाते हैं। लेकिन कई बार इन अनुष्ठानों के दौरान या बाद में कुछ ऐसी घटनाएं घटती हैं, जो हमें अचंभित कर देती हैं। ऐसी ही एक विरल घटना है—हवन पूर्ण होने के कई घंटों बाद अग्नि का स्वयं प्रज्वलित होना। विशेषकर यदि हवन कुंड में रखे 'नारियल के गोले' में अचानक ज्वाला उठती है और फिर स्वतः शांत हो जाती है, तो इसके पीछे गहरे आध्यात्मिक और ज्योतिषीय संकेत छिपे होते हैं। आज के इस विशेष लेख में हम इसी रहस्यमयी और मंगलकारी घटना का विस्तार से विश्लेषण करेंगे।
1. आहुति की स्वीकार्यता का साक्षात प्रमाण
ये भी पढ़ें शम्मी कपूर की वजह से चमका था राजीव कपूर का शुरुआती करियर, एक हिट देने के बाद बदल गई थी जिंदगी2. 'गोले' (नारियल) में अग्नि का उठना: नकारात्मकता का भस्म होना
हवन में नारियल या गोले को 'ब्रह्मांड' और 'अहंकार' का प्रतीक माना जाता है। इसमें अचानक आग उठने का अर्थ है कि घर के भीतर या परिवार के सदस्यों (विशेषकर जिनके लिए अनुष्ठान हुआ है) पर जो भी नकारात्मक ऊर्जा, नजर दोष या अदृश्य बाधाएं थीं, उन्हें अग्नि देव ने पूरी तरह जलाकर भस्म कर दिया है। यह एक प्रकार का 'कॉस्मिक क्लींजिंग' (Cosmic Cleansing) है।
3. पितरों और इष्ट देव की उपस्थिति
शास्त्रों में उल्लेख है कि शांति पाठ के बाद अग्नि का पुनः जागृत होना पितरों की प्रसन्नता को दर्शाता है। यदि परिवार में लंबे समय से कोई तनाव था या संतान के जीवन में रुकावटें आ रही थीं, तो यह ज्योति इस बात का संकेत है कि अब वह मार्ग प्रशस्त हो गया है। यह दिव्य ज्योति परिवार को मिलने वाले 'संरक्षण कवच' का प्रतीक है।
4. रात्रि काल में अग्नि का महत्व
रात में अचानक अग्नि का प्रज्वलित होना आध्यात्मिक दृष्टि से और भी शक्तिशाली माना जाता है। इस समय ब्रह्मांडीय ऊर्जाएं अत्यंत सक्रिय होती हैं। इस समय उठी ज्वाला यह बताती है कि घर में अब सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा और सुख-शांति का स्थायी वास होगा।
क्या करें ऐसी स्थिति में ?
यदि आपके घर में भी ऐसी घटना हो, तो इसे देखकर डरना नहीं चाहिए। यह एक परम शुभ संकेत है। ऐसी स्थिति में हाथ जोड़कर अग्नि देव को प्रणाम करना चाहिए और अपने परिवार के कल्याण की कामना करनी चाहिए। यह ज्योति उस शांति और समृद्धि का अग्रदूत है, जिसके लिए आपने अनुष्ठान कराया था।
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लेखक के बारे में
मुज़फ्फरनगर के प्रमुख ज्योतिषविद संजय सक्सेना पिछले 25 वर्षों से 'शिवालिक राशिरत्न केंद्र' के माध्यम से ज्योतिष, वास्तु और रत्न विज्ञान के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए हैं। संजय जी को ज्योतिष की गहन और प्रामाणिक शिक्षा वेदपाठी भवन के विख्यात विद्वान प्रियशील चतुर्वेदी (रतन गुरु) जी के सानिध्य में प्राप्त हुई है। उल्लेखनीय है कि उनके गुरु रतन गुरु जी, काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के पूर्व कुलपति एवं सुप्रसिद्ध साहित्यकार स्वर्गीय सीता राम चतुर्वेदी जी के सुपुत्र हैं, जिससे संजय सक्सेना जी को एक अत्यंत समृद्ध और विद्वान गुरु-परंपरा का लाभ मिला है।
संजय सक्सेना जी की सबसे बड़ी विशेषज्ञता 'प्रश्न लग्न' में है। ज्योतिष की यह एक ऐसी विधा है जिसमें बिना जन्म कुंडली के भी जातक की तात्कालिक समस्याओं का सटीक विश्लेषण किया जा सकता है। अपनी इस विशेषज्ञता और ढाई दशकों के अनुभव के आधार पर वे न केवल सटीक भविष्यवाणी करते हैं, बल्कि वास्तु और रत्नों के माध्यम से प्रभावी समाधान भी प्रदान करते हैं। उनकी पारखी नज़र और शास्त्रीय ज्ञान ने उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विश्वसनीय ज्योतिषियों में शामिल किया है। ज्योतिषीय परामर्श, वास्तु ज्ञान या शुद्ध रत्नों की जानकारी हेतु उनसे मोबाइल नंबर 9837400222 पर संपर्क किया जा सकता है।

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