गुरुवार विशेष: क्या आपकी कुंडली में 'गुरु' हैं बलवान? जानें जीवन में सुख-समृद्धि और सफलता के गुप्त ज्योतिषीय संकेत
ज्योतिष शास्त्र में देवगुरु बृहस्पति (गुरु) को सबसे शुभ ग्रह माना गया है। कहते हैं कि यदि कुंडली में गुरु की स्थिति मजबूत हो, तो व्यक्ति मिट्टी को भी छुए तो वह सोना बन जाती है। आज गुरुवार के अवसर पर आइए जानते हैं कि गुरु ग्रह हमारे जीवन को कैसे प्रभावित करते हैं और कैसे हम छोटे-छोटे बदलावों से अपनी सोई हुई किस्मत को जगा सकते हैं।
कैसे पहचानें कि आपका 'गुरु' मजबूत है?
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निर्णय क्षमता: आप सही समय पर सही फैसले लेते हैं और लोग आपसे सलाह लेने आते हैं।
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आर्थिक स्थिरता: आपके पास धन का अभाव नहीं रहता और आय के स्रोत बने रहते हैं।
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मान-सम्मान: समाज और परिवार में आपको सम्मान मिलता है और आप धार्मिक कार्यों में रुचि रखते हैं।
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संतान सुख: मजबूत गुरु उत्तम संतान और सुखी पारिवारिक जीवन का वरदान देते हैं।
कमजोर गुरु के लक्षण (सावधानी के संकेत)
यदि बनते काम बिगड़ रहे हों, विवाह में देरी हो रही हो, या पेट से जुड़ी बीमारियां पीछा न छोड़ रही हों, तो यह कमजोर गुरु के संकेत हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में व्यक्ति का ज्ञान सही दिशा में काम नहीं करता। जिसका गुरु कमजोर है, उसे विशेष रूप से पीले वस्त्र धारण करने चाहिए और स्नान करते समय जल में हल्दी का प्रयोग करना चाहिए।
गुरु को प्रसन्न करने और भाग्य उदय के अचूक उपाय
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मंदिर की सेवा और स्वच्छता: मंदिर जी की सफाई करने से जीवन में अभूतपूर्व लाभ होता है। इससे व्यक्तित्व के विकास के साथ चारों दिशाओं में तरक्की का योग बनता है और शारीरिक कष्ट समाप्त हो जाते हैं। मंदिर की सफाई करना बृहस्पति ग्रह को उच्च स्तर का बनाता है।
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दीपक का दान: अपने पूजा घर में या मंदिर जी में जाकर शुद्ध देसी घी का दीपक जलाने से गुरुदेव प्रसन्न होते हैं और बृहस्पति ग्रह का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
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बुजुर्गों का सम्मान: अपने से बड़े बुजुर्गों और आस-पड़ोस के वृद्धों को आदर-सम्मान देना एवं उनकी सेवा करना बृहस्पति ग्रह का सबसे बड़ा उपाय माना जाता है। अपने पूर्वजों को याद करना भी शुभ गुरु फल प्रदान करता है।
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स्नान और पहनावा: बृहस्पतिवार के दिन पीले वस्त्र पहनना और जल में हल्दी डालकर नहाने से गुरुबल की प्राप्ति होती है।
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केले के पेड़ की पूजा: गुरुवार को केले के पेड़ की पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है।
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मंत्र और दान: चने की दाल, केसर या हल्दी का दान करें और 'ॐ बृं बृहस्पतये नमः' का जाप करें।
आज का विशेष विचार
क्या आप जानते हैं? कुंडली के 12 भावों में से गुरु अकेले 5 भावों के कारक होते हैं। इसलिए, यदि अन्य ग्रह थोड़े कमजोर भी हों, लेकिन गुरु बलवान हो, तो व्यक्ति जीवन की हर बाधा को पार कर लेता है।
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लेखक के बारे में
मुज़फ्फरनगर के प्रमुख ज्योतिषविद संजय सक्सेना पिछले 25 वर्षों से 'शिवालिक राशिरत्न केंद्र' के माध्यम से ज्योतिष, वास्तु और रत्न विज्ञान के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए हैं। संजय जी को ज्योतिष की गहन और प्रामाणिक शिक्षा वेदपाठी भवन के विख्यात विद्वान प्रियशील चतुर्वेदी (रतन गुरु) जी के सानिध्य में प्राप्त हुई है। उल्लेखनीय है कि उनके गुरु रतन गुरु जी, काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के पूर्व कुलपति एवं सुप्रसिद्ध साहित्यकार स्वर्गीय सीता राम चतुर्वेदी जी के सुपुत्र हैं, जिससे संजय सक्सेना जी को एक अत्यंत समृद्ध और विद्वान गुरु-परंपरा का लाभ मिला है।
संजय सक्सेना जी की सबसे बड़ी विशेषज्ञता 'प्रश्न लग्न' में है। ज्योतिष की यह एक ऐसी विधा है जिसमें बिना जन्म कुंडली के भी जातक की तात्कालिक समस्याओं का सटीक विश्लेषण किया जा सकता है। अपनी इस विशेषज्ञता और ढाई दशकों के अनुभव के आधार पर वे न केवल सटीक भविष्यवाणी करते हैं, बल्कि वास्तु और रत्नों के माध्यम से प्रभावी समाधान भी प्रदान करते हैं। उनकी पारखी नज़र और शास्त्रीय ज्ञान ने उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के विश्वसनीय ज्योतिषियों में शामिल किया है। ज्योतिषीय परामर्श, वास्तु ज्ञान या शुद्ध रत्नों की जानकारी हेतु उनसे मोबाइल नंबर 9837400222 पर संपर्क किया जा सकता है।
