दिल्ली-एनसीआर में ग्रेप-3 हटा, निर्माण और पुरानी कारों को राहत
नयी दिल्ली। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग की ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान-ग्रेप की उप-समिति ने वायु गुणवत्ता और पूर्वानुमान में सुधार के मद्देनजर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली-एनसीआर में ग्रेप-3 के प्रतिबंध को हटा दिया है। दिल्ली के औसत वायु प्रदूषण में गिरावट के बाद उप-समिति ने 16 जनवरी को ग्रेप-3 को लागू किया था और उसके बाद, दिल्ली की वायु गुणवत्ता में गिरावट देखी गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की दैनिक रिपोर्ट के अनुसार औसत सुधार 20 जनवरी को 378 से सुधरकर 21 जनवरी को 330 और 22 जनवरी को 322 पर आ गया। इस सुधार को देखते हुए और मौसम विज्ञान विभाग तथा उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान के वायु गुणवत्ता और मौसम संबंधी पूर्वानुमानों को देखते हुए उप-समिति ने स्थिति की समीक्षा की जिसमें सुधार पाये जाने के बाद गुरुवार की बैठक में ग्रेप-3 हटाने का निर्णय लिया।
इससे पहले राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और निकटवर्ती क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग के प्रवर्तन कार्य बल (ईटीएफ) की बुधवार को 124वीं बैठक हुई जिसमें सात जनवरी से 19 जनवरी के दौरान राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में की गई निरीक्षण एवं प्रवर्तन संबंधी गतिविधियों की समीक्षा की गई। इस अवधि के दौरान, आयोग के उड़न दस्तों ने उद्योग, डीजल जनरेटर सेट, निर्माण एवं विध्वंस (सी एंड डी) संबंधी गतिविधियों, सड़क की धूल और बायोमास जलाने एवं नगरपालिका ठोस अपशिष्ट (एमएसडब्ल्यू) जमा होने या जलाने सहित वायु प्रदूषण के मुख्य क्षेत्रों का व्यापक पैमाने पर निरीक्षण किया।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।
