उत्तर प्रदेश में होली पर बरसा 'गोमाता' का आशीर्वाद, गोबर की राख और फूलों से महका प्राकृतिक गुलाल
योगी सरकार की गोसंवर्धन नीति से ग्रामीण महिलाओं के जीवन में घुले सफलता के रंग, केमिकल मुक्त रही होली
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में इस बार होली का उल्लास न केवल पारंपरिक रंगों से, बल्कि गोमाता के संरक्षण और ग्रामीण महिलाओं के स्वावलंबन की नई मिसाल से सराबोर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की 'गोसंवर्धन नीति' के चलते प्रदेश के विभिन्न जिलों में पूरी तरह से प्राकृतिक तत्वों से 'ऑर्गेनिक गुलाल' तैयार कराया गया है। यह अनूठी पहल न केवल पर्यावरण और स्वास्थ्य के अनुकूल है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान कर रही है।
उत्तर प्रदेश में होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि गांवों की अर्थव्यवस्था, गोसंवर्धन और महिला सशक्तिकरण का उत्सव का सबब नी है। योगी आदित्यनाथ सरकार की गोसंवर्धन नीति के तहत प्रदेश के कई जिलों में पूरी तरह प्राकृतिक तत्वों से ‘ऑर्गेनिक गुलाल’ तैयार किया जा रहा है। यह पहल न सिर्फ पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए सुरक्षित है, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के लिए आय का नया जरिया भी बन रही है। वहीं गोसेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता के अनुसार, इस विशेष गुलाल को तैयार करने में किसी भी प्रकार के हानिकारक केमिकल का उपयोग नहीं किया जा रहा है। ग्रामीण महिलाएं गोशाला पालकों के सहयोग से लाल और गुलाबी रंग के लिए चुकंदर व गुलाब की पंखुड़ियाँ, हरे और बैंगनी रंग प्रदान करने के लिए पालक व जामुन की पत्तियाँ तथा नीले रंग के आधार के लिए नील (इंडिगो) जैसी प्राकृतिक वस्तुओं का उपयोग कर रही हैं। जबकि गोबर की राख से गुलाल का वैज्ञानिक और आध्यात्मिक आधार तैयार किया जा रही है। इस गुलाल की सबसे बड़ी विशेषता देशी गाय के गोबर के कंडों की राख का उपयोग है। पारंपरिक रूप से शुद्धिकारक मानी जाने वाली इस राख का वैज्ञानिक महत्व भी है।
मॉडल बनकर उभरी 'ऑर्गेनिक होली'
गोसेवा आयोग के अनुसार उत्तर प्रदेश की यह 'ऑर्गेनिक होली' देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बनकर उभर रही है, जहाँ परंपरा, विज्ञान और स्वरोजगार का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार इस राख में मौजूद 'क्षारीय तत्व' नमी को सोख लेते हैं, जिससे सूक्ष्मजीवों की वृद्धि रुक जाती है। प्रसंस्करण के बाद यह राख गुलाल को एक बेहद मुलायम टेक्सचर देती है, जिससे यह त्वचा पर जलन पैदा नहीं करता और आसानी से निकल जाता है।
बुलंदशहर से मुरादाबाद तक रोजगार की बहार
यह अभियान केवल रंग बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसने प्रदेश के बुलंदशहर, मथुरा, बिजनौर, सहारनपुर, संभल, उरई और मुरादाबाद जैसे कई जिलों में रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में प्रमुख उत्पादन केंद्रों की भूमिका रही है। इन केंद्रों नारी सशक्तिकरण को बढ़ावा मिल रहा है, जहां हजारों ग्रामीण महिलाएं इस कार्य से जुड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। वहीं गोवंश संरक्षण की दिशा में गोशालाओं से प्राप्त गोबर और अन्य सामग्रियों के व्यावसायिक उपयोग से गोवंश का पालन अब किसानों के लिए अधिक लाभकारी सिद्ध हो रहा है।
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लेखक के बारे में
ओ.पी. पाल पिछले साढ़े तीन दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय एक प्रतिष्ठित नाम हैं। भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त (P.I.B. Accredited) वरिष्ठ पत्रकार श्री पाल ने लंबे समय तक लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही के साथ-साथ गृह, रक्षा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की नेशनल ब्यूरो स्तर पर रिपोर्टिंग की है।
अमर उजाला और दैनिक जागरण से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले श्री पाल ने 'शाह टाइम्स' में न्यूज़ एडिटर और 'हरिभूमि' (दिल्ली) में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में लंबी सेवाएं दी हैं। राजनीति विज्ञान और कृषि के विशेषज्ञ होने के साथ-साथ वे 'साहित्य रत्न' से भी विभूषित हैं। वर्तमान में वे एक स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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