श्रावस्ती में किसान यूनियन की महिला जिलाध्यक्ष की बेरहमी से हत्या, जंगल में मिला कंकाल, प्रेमी गिरफ्तार
ब्लैकमेलिंग और अवैध संबंधों के जाल में उलझी 'आंचल' की जिंदगी, 14 दिन बाद खोपड़ी और हड्डियों से हुई पहचान
श्रावस्ती। उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जनपद से एक रूह कंपा देने वाली वारदात सामने आई है। जहाँ भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) की महिला विंग की जिलाध्यक्ष आंचल मिश्रा की उनके ही प्रेमी ने गला दबाकर हत्या कर दी। हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से शव को ककरदरी रेंज के घने जंगल में फेंक दिया गया था। करीब 15 दिन बाद पुलिस ने जंगल से महिला का क्षत-विक्षत नरकंकाल बरामद किया है।
पुलिस अधीक्षक श्रावस्ती राहुल भाटी ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि आरोपी सूरज वर्मा को गिरफ्तार कर लिया गया है। पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। घटना के अनुसार बांसगढ़ी फत्तेपुर बनगई गांव की निवासी आंचल मिश्रा (25) पिछले माह 17 फरवरी को भिनगा में संगठन की बैठक में शामिल होने की बात कहकर घर से निकली थीं। जब वह वापस नहीं लौटीं, तो परिजनों ने काफी तलाश की। हार मानकर पति संतोष मिश्रा ने 19 फरवरी को मल्हीपुर थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई और गांव के ही सूरज वर्मा पर शक जाहिर किया।
जंगल में बिखरी मिलीं हड्डियां और कपड़े
पुलिस ने जब सर्विलांस और मोबाइल लोकेशन की मदद ली, तो ककरदरी के जंगल में संदेह गहराया। 3 मार्च को सर्च ऑपरेशन के दौरान पुलिस के पैरों तले जमीन खिसक गई। जंगल के भीतर आंचल का जला हुआ और जंगली जानवरों द्वारा नोचा गया कंकाल मिला। मौके पर केवल खोपड़ी, जबड़ा और रीढ़ की हड्डी ही शेष थी। कुछ दूरी पर पड़े कपड़ों और जूतों से परिजनों ने शव की पहचान की।
ब्लैकमेलिंग बनी हत्या की वजह
पुलिस की पूछताछ में आरोपी ने आरोपी सूरज वर्मा ने अपना जुर्म कबूल करते हुए बताया कि उसके और आंचल के बीच पिछले 3-4 महीनों से प्रेम प्रसंग चल रहा था। आरोपी का दावा है कि आंचल उसे पैसों के लिए ब्लैमेल कर रही थी और शिकायत करने की धमकी दे रही थी। इसी वजह से 17 फरवरी को आरोपी उसे बहला-फुसलाकर जंगल ले गया और वहां गला दबाकर उसकी जीवनलीला समाप्त कर दी।
दो मासूम बच्चों के सिर से उठा मां का साया
मृतक आंचल मिश्रा अपने पीछे दो छोटे बच्चों को छोड़ गई हैं। वह किसान राजनीति में सक्रिय थीं और महिला जिलाध्यक्ष के रूप में क्षेत्र में पहचानी जाती थीं। इस जघन्य हत्याकांड के बाद से पूरे जनपद में आक्रोश का माहौल है। पुलिस ने अवशेषों को पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है ताकि डीएनए मिलान के जरिए वैज्ञानिक साक्ष्य पुख्ता किए जा सकें।
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लेखक के बारे में
ओ.पी. पाल पिछले साढ़े तीन दशकों से पत्रकारिता में सक्रिय एक प्रतिष्ठित नाम हैं। भारत सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त (P.I.B. Accredited) वरिष्ठ पत्रकार श्री पाल ने लंबे समय तक लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही के साथ-साथ गृह, रक्षा और कृषि जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की नेशनल ब्यूरो स्तर पर रिपोर्टिंग की है।
अमर उजाला और दैनिक जागरण से पत्रकारिता की शुरुआत करने वाले श्री पाल ने 'शाह टाइम्स' में न्यूज़ एडिटर और 'हरिभूमि' (दिल्ली) में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में लंबी सेवाएं दी हैं। राजनीति विज्ञान और कृषि के विशेषज्ञ होने के साथ-साथ वे 'साहित्य रत्न' से भी विभूषित हैं। वर्तमान में वे एक स्वतंत्र पत्रकार और स्तंभकार के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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