Saturday, April 5, 2025

शामली में अपर दोआब शुगर मिल की टरबाईन में आई तकनीकी खराबी से लगातार पांचवे दिन भी रहा जाम

शामली। अपर दोआब शुगर मिल की टरबाईन में आई तकनीकी खराबी से लगातार पांचवे दिन भी शहर में भूषण जाम लगा रहा। जाम का झाम इस कदर था कि लोगो को सडक पर चलने का रास्ता तक नही मिल सका। स्कूली वाहन भी जाम में फंसे रहे। महिलाआें, बच्चों और बुर्जुगों को गन्ने के वाहनों के बीच से होकर गुजरना पडा। लगातार लगने वाले जाम से शहर के व्यापारियों का व्यापार पर पूरी तरह से चौपट हो गया है, लेकिन जिला प्रशासन द्वारा गन्ने के वाहनों के जाम से कोई स्थायी समाधान नही निकाला गया।

 

पिछले पांच दिनों से लगाकार शामली शुगर मिल में तकनीकी खराबी चल रही है, जिस कारण शुगर मिल रूक-रूककर चला रहा है। गत रविवार देर रात्रि करीब 10 बजे मिल की टरबाईन अचानक से फुक गई, जिसके बाद मिल का पेराई कार्य करीब एक बजे तक बंद रहा। रात्रि में शुगर मिल में गन्ना लेकर आने वाले किसानों की लंबी लंबी लाईने लग गई और पूरा शहर गन्ने के वाहनों से जाम हो गया। सवेरे होते होते पूरा शहर गन्ने के वाहनों से जाम हो गया। शुगर मिल द्वारा जारी किए गए इंटेट के कारण किसान अपना गन्ना लेकर पहुंचे दिन। गन्ने के वाहनों से दिनभर जाम लगा रहा। जाम मिल गेट से प्रारंभ होकर अग्रसैन पार्क, कोतवाली गेट, हनुमान रोड, वर्मा मार्किट रोड से होते हुए वीवी इंटर कालेज रोड तक पहुंच गया था। वही दूसरी ओर जाम शहर के सुभाष चौक तक लगा रहा। जाम के कारण महिलाऐं, छोटे बच्चे परेशान रहे।

 

 

महिलाओं को बाजार में खरीदारी करने के लिए गन्ने के वाहनों के बीच से होकर गुजरना पडा। ई-रिक्शा चालक, साईकल चालक व अन्य वाहन चालक जाम के झाम में फंसे रहे, लेकिन निकलने का रास्ता तक नही मिल सका। जाम को खुलवाने में ट्रेफिक पुलिसकर्मी लगे रहे, लेकिन जाम खुलता दिखाई नही दिया। दुकानदारों शिवम बंसल, देवाशीष बंसल, अरूण कुमार, सचिन जैन का कहना है कि लगातार पांच दिनों से शहर में भीषण जाम लगा हुआ है, जिस कारण व्यापारी पूरी तरह से प्रभावित है।

 

शहर के हनुमान रोड, अस्पताल रोड पर गन्ना वाहनों का जाम लगने से मरीजों को भी परेशानियों का सामना करना पड रहा है। सोमवार को सीएचसी शामली जाने वाले मरीजों को अस्पताल जाने का रास्ता नही मिल सका। गंभीर बीमार व गर्भवती महिलाओं के लिए लगातार अस्पताल से जाने वाली एम्बुलेंस भी जाम के झाम में फंसी रही। ऐसे में यदि कोई इमरजेंसी लेकर एम्बुलेंस पहुंचती तो शायद किसी मरीज की जान भी जा सकता थी।

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