यूजीसी विवाद पर ओम प्रकाश राजभर का जवाब- सामान्य वर्ग को सरकार पर भरोसा नहीं तो जाएं कोर्ट
राजभर ने याद दिलाया कि जब 27 प्रतिशत आरक्षण पिछड़ा वर्ग के लिए लागू हुआ, तब भी यही वर्ग विरोध कर रहा था। पिछड़ा वर्ग सुप्रीम कोर्ट गया था, जहां से उन्हें न्याय मिला और 27 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था लागू की गई। उन्होंने यह भी कहा कि इसी तरह सामान्य वर्ग को कोई अंदेशा है और सरकार पर अगर भरोसा नहीं है तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर भी मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने जवाब दिया। उन्होंने कहा, "साधु संत अपने उद्देश्य की पूर्ति के लिए संगम स्नान करने जाते हैं, न कि वहां जाकर राजनीति का एक मोहरा बनते हैं। शंकराचार्य एक तरीके से राजनीति के मोहरा बने हैं।" उन्होंने कहा कि स्नान के साथ पूजा-पाठ करें और ठहरें, इससे किसी को परेशानी नहीं होती। लेकिन वे प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के खिलाफ गलत बयानबाजी कर रहे हैं। सारे विपक्ष के नेता आपके रहनुमा बन चुके हैं, तो यह साफ तौर पर राजनीति को दर्शाता है।
राजभर ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बयानों के बाद उन पर अजित पवार के निधन को लेकर राजनीति करने के आरोप लगाए। उन्होंने कहा, "अजित पवार जी से दुश्मनी हो सकती है, लेकिन जो पायलट थे, उनसे क्या दुश्मनी थी? उनके साथ चार लोगों की डेथ और हुई न? उन चार लोगों से कौन-सी दुश्मनी थी? तो ये उनका विषय है। सरकार अपना काम कर रही है। कहने के लिए कोई कुछ भी कह सकता है।"
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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