अजित पवार विमान हादसे पर एविएशन एक्सपर्ट बोले, सीवीआर-एफडीआर के विश्लेषण के बाद ही सच्चाई आएगी सामने
बेंगलुरु। महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार की विमान हादसे को लेकर नागरिक उड्डयन विशेषज्ञ कैप्टन अनंत माथुर ने अहम जानकारी दी। गुरुवार को उन्होंने साफ कहा कि बिना ठोस डाटा के दुर्घटना की वजह बताना संभव नहीं है। कैप्टन माथुर ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "मेरे पास अभी कोई ऐसा डाटा नहीं है, जिसके आधार पर मैं यह बता सकूं कि यह हादसा क्यों हुआ? इसके लिए सीवीआर (कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर) और एफडीआर (फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर) को बरामद करना और उनका विश्लेषण करना जरूरी है।" उन्होंने हादसे में जान गंवाने वाले क्रू, वीआईपी यात्री और केबिन क्रू के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की।
कैप्टन अनंत माथुर ने बताया कि शुरुआती जानकारी के अनुसार हादसे के वक्त दृश्यता करीब 3 किलोमीटर थी। उन्होंने यह भी समझाया कि आम लोग जिस दृश्यता को जमीन से देखते हैं, उसे 'हॉरिजॉन्टल विजिबिलिटी' कहा जाता है, लेकिन पायलट के लिए जो दृश्यता सबसे अहम होती है, वह 'स्लांट विजिबिलिटी' होती है यानी वह दृष्टि, जिससे पायलट रनवे और विमान की दिशा को सही तरीके से देख पाता है।
कैप्टन माथुर ने आगे कहा कि जांच एजेंसियां निश्चित रूप से ब्लैक बॉक्स का विश्लेषण करेंगी। जांच की प्रक्रिया दो चरणों में होती है। पहले एक प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की जाती है, जिसमें हादसे से जुड़ी शुरुआती जानकारियां सामने आती हैं। इसके बाद एक अंतिम रिपोर्ट तैयार की जाती है, जो सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होती है और जिसमें हादसे की असली वजह और जिम्मेदार कारकों का पूरा विवरण होता है।
उन्होंने यह भी कहा कि जब तक अंतिम रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक किसी भी तरह के निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। हमें तथ्यों और तकनीकी जांच पर भरोसा करना चाहिए, न कि अटकलों पर। महाराष्ट्र के उप मुख्यमंत्री और एनसीपी प्रमुख अजीत पवार का अंतिम संस्कार गुरुवार को बारामती में पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। पवार के अंतिम संस्कार में उनका पूरा परिवार मौजूद रहा। पवार के दोनों बेटों ने उन्हें मुखाग्नि दी।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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