सूर्य ग्रहण 17 फरवरी और चंद्र ग्रहण 3 मार्च 2026: समय, प्रभाव और शास्त्रीय उपाय
मेरठ। चंद्रमास फाल्गुन 2 फरवरी से आरंभ हुआ था। फाल्गुन कृष्ण पक्ष की अमावस्या 17 फरवरी को है। और इस दिन सूर्य ग्रहण पड़ रहा है। पंडित शिवकुमार शर्मा के अनुसार यह ग्रहण 17 फरवरी 2026 को दिन में 3:26 से रात को 7:58 बजे तक रहेगा। यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।
यह ग्रहण अंटार्कटिका अर्जेंटीना, चिली, मेडागास्कर, मॉरीशस, नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया, जिंबॉब्वे ,पोर्ट लुई आदि देशों में देखा जा सकेगा।
भारत में इसको नहीं देखा जा सकेगा इसलिए भारत में कोई इसका प्रभाव और सूतक का विचार नहीं होगा।
चंद्र ग्रहण शुक्ल पक्ष पूर्णिमा को होता है। इस बार होली के दिन अर्थात 3 मार्च को चंद्र ग्रहण पड़ेगा। यह ग्रहण पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि पर पड़ रहा है। सिंह, वृश्चिक, मीन ,कर्क राशि पर इसका दुष्प्रभाव पड़ सकता है। अन्य राशियों के लिए सामान्य फल रहेगा।
चंद्र ग्रहण भारत में दृश्यमान होगा। यह 3 मार्च को भारतीय समय के अनुसार दिन में 3:20 बजे से शाम 6:47 बजे तक खग्रास चंद्र ग्रहण होगा. यह ग्रहण भारत के अधिकांश भागों में चंद्र उदय के समय ही ग्रस्त होता हुआ दिखाई देगा। चंद्र ग्रहण की कुल अवधि 3 घंटे 27 मिनट होगी। चंद्रग्रहण में 9 घंटे पहले सूतक लग जाता है। इसलिए प्रातः काल 6:20 से चंद्र ग्रहण का सूतक आरंभ हो जाएगा ।शास्त्रों में कहा गया कि सूतक काल व ग्रहण काल में बालक, वृद्ध और रोगी को छोड़कर अन्य किसी को भोजन और शयन नहीं करना चाहिए। ग्रहण के समय घर में बनाए गए भोज्य पदार्थों में तुलसी दल अथवा कुशा रख देनी चाहिए ताकि उसे पर ग्रहण का दुष्प्रभाव न पड़े।
गर्भवती महिला को ग्रहण काल में धारदार चाकू, छुरी, कैंची आदि से फल, सब्जी ,कपड़े आदि नहीं काटने चाहिए। घूमते रहे, कुछ समय बैठकर भगवान का पूजन, भजन, ध्यान करें। एक जगह पर अधिक देर ना बैठ ना सोएं। एक चंद्रमास में दो ग्रहण होने से द्विग्रहण योग बनता है।
ज्योतिषीय दृष्टि से द्विग्रहण का फल इस प्रकार कहा गया है।
विश्व में किसी भी देश में शासन परिवर्तन या सत्ता संघर्ष,आर्थिक अस्थिरता,भूकंप, अग्निकांड, तूफान जैसी घटनाएं,धार्मिक या सामाजिक उथल-पुथल आदि के योग बनते हैं। जिन व्यक्तियों की जन्म पत्रिका में में राहु–केतु, सूर्य या चंद्रमा पीड़ित हों, जिनकी महादशा,अंतर्दशा अथवा राहु–केतु या सूर्य–चंद्र की महादशा हो, अथवा जिन व्यक्तियों की जन्म राशि पर ग्रहण पड़े। उनके लिए मानसिक तनाव, स्वास्थ्य समस्या, पारिवारिक चिंता, निर्णय भ्रम आदि हो सकते हैं। धर्मशास्त्रों में ग्रहण को आत्मचिंतन और शुद्धि का समय माना गया है। जप, तप, दान का हजार गुना फल। मंत्र सिद्धि का उत्तम समय एवं
उन्होंने बताया कि पितृ शांति के लिए श्राद्ध,तर्पण आदि पितरों के निमित्त किये गए कार्य दान आदि विशेष फलदायी होते हैं।
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