फाल्गुन विनायक चतुर्थी 2026 पर बन रहे 3 महाशुभ योग, इस समय करें गणेश पूजा और भूलकर भी न देखें चंद्रमा
अगर आप भगवान गणेश की कृपा पाना चाहते हैं और फरवरी में आने वाली विनायक चतुर्थी का व्रत रखने की तैयारी कर रहे हैं तो यह जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है। फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को फाल्गुन विनायक चतुर्थी का व्रत रखा जाता है। इसे फरवरी विनायक चतुर्थी और ढुण्ढिराज चतुर्थी भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि विधान से पूजा करने पर मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन के कार्यों में सफलता मिलती है।
फाल्गुन विनायक चतुर्थी 2026 की तिथि और व्रत का दिन
दृक पंचांग के अनुसार फाल्गुन शुक्ल चतुर्थी तिथि का प्रारंभ 20 फरवरी को दोपहर 2 बजकर 38 मिनट से होगा। यह तिथि 21 फरवरी को दोपहर 1 बजे तक रहेगी। उदयातिथि के आधार पर व्रत 21 फरवरी शनिवार को रखा जाएगा।
इस दिन भगवान गणेश की पूजा दोपहर में करना श्रेष्ठ माना गया है। पूजा का शुभ समय 11 बजकर 27 मिनट से दोपहर 1 बजे तक रहेगा। इस अवधि में भक्त श्रद्धा और विश्वास के साथ गणपति की आराधना कर सकते हैं।
अभिजित मुहूर्त और ब्रह्म मुहूर्त का महत्व
चतुर्थी के दिन अभिजित मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 12 मिनट से 12 बजकर 58 मिनट तक रहेगा। यह समय विशेष रूप से शुभ माना जाता है। वहीं ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 13 मिनट से 6 बजकर 4 मिनट तक रहेगा। इस समय ध्यान और पूजा करने से सकारात्मक ऊर्जा मिलती है और मन को शांति प्राप्त होती है।
3 शुभ योग में बन रहा है खास संयोग
21 फरवरी को इस पावन तिथि पर तीन शुभ योग का निर्माण हो रहा है। रवि योग सुबह 6 बजकर 54 मिनट से शाम 7 बजकर 7 मिनट तक रहेगा। शुभ योग प्रातःकाल से दोपहर 3 बजकर 51 मिनट तक रहेगा। इसके बाद शुक्ल योग शुरू होगा। इन शुभ योग में पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
13 घंटे 20 मिनट तक न करें चंद्र दर्शन
फाल्गुन विनायक चतुर्थी के दिन चंद्रमा का दर्शन वर्जित माना गया है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा देखने से झूठा कलंक लग सकता है। इस तिथि पर चंद्रोदय सुबह 8 बजकर 56 मिनट पर होगा और चंद्रास्त रात 10 बजकर 16 मिनट पर होगा। इस प्रकार करीब 13 घंटे 20 मिनट तक चंद्र दर्शन से बचना चाहिए।
जो भक्त सच्चे मन से व्रत रखते हैं और गणेश जी की पूजा करते हैं उनके जीवन में सुख समृद्धि और सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। यह दिन विघ्नहर्ता की कृपा पाने का विशेष अवसर माना जाता है।
Disclaimer: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और पंचांग आधारित जानकारी पर तैयार किया गया है। व्रत और पूजा से संबंधित अंतिम निर्णय अपने परिवार की परंपरा और विद्वान आचार्य की सलाह के अनुसार लें।
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