प्रयागराज माघ मेले में पुलिस और संत अविमुक्तेश्वरानंद में तीखी झड़प, पालकी खींच ले गए, पुलिस ने शिष्य को बाल पकड़कर पीटा, बिना स्नान लौटे
प्रयागराज। संगम नगरी में चल रहे माघ मेले के बीच एक चौंकाने वाली घटना ने आस्था और सुरक्षा दोनों पर सवाल खड़ा कर दिया। ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के एक शिष्य को पुलिस चौकी में बेरहमी से पीटा गया। वायरल हुए वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिसकर्मी शिष्य को जमीन पर पटकते, बाल पकड़कर घसीटते और मुक्कों से मारते हैं। घटना के बाद संत समाज में भारी आक्रोश व्याप्त है।
घटना की सूचना जैसे ही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के शिविर तक पहुंची, उनके समर्थकों और शिष्यों की भारी भीड़ जमा हो गई। संतों ने इसे 'भगवा और संतों का अपमान' करार दिया और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल बर्खास्तगी तथा कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की। उनका कहना है कि मेला क्षेत्र में सुरक्षा का जिम्मा संभालने वाली पुलिस ही अगर रक्षक से भक्षक बन जाएगी, तो श्रद्धालु कहां जाएंगे।
इस मामले में प्रशासन ने भी संज्ञान लिया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने बताया कि संबंधित चौकी के दोषी पुलिसकर्मियों को चिन्हित किया जा रहा है और मामले की विभागीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सामने आए वीडियो में यह भी स्पष्ट है कि विवाद शंकराचार्य की पारंपरिक पालकी को लेकर हुआ। शंकराचार्य संगम स्नान के लिए जा रहे थे, तभी पुलिसकर्मियों ने सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के नाम पर उन्हें रोक दिया। शिष्यों ने विरोध किया तो पुलिस ने बल प्रयोग किया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पालकी को भी पुलिस ने खींचा, जिससे श्रद्धालु और शिष्य दोनों आक्रोशित हो गए।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस अपमान के बाद स्नान त्याग दिया और बिना स्नान किए ही शिविर लौट आए। इस घटना ने पूरे माघ मेले के वातावरण को तनावपूर्ण बना दिया। शिष्यों और संतों का कहना है कि यह घटना सनातन परंपरा और धर्मगुरु के सम्मान के खिलाफ है।
प्रशासन ने कहा कि मार्ग डाइवर्जन और भीड़ नियंत्रण के दौरान कुछ भ्रम पैदा हुआ था। वायरल वीडियो की जांच की जा रही है और दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने संतों और जनता से शांति बनाए रखने की अपील की है।
माघ मेले में यह घटना न केवल पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा कर रही है, बल्कि धार्मिक आस्था और श्रद्धालुओं की सुरक्षा के मुद्दे को भी प्रमुखता से सामने ला रही है।
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