अभी करें सब्जियों की अगेती खेती, फरवरी में बोआई और गर्मियों में होगी रिकॉर्ड तोड़ कमाई
फरवरी का महीना खेती के लिहाज से बेहद खास माना जाता है क्योंकि यही वह समय है जब सही फैसला आपकी पूरी गर्मी की कमाई तय कर देता है। सर्दियों की विदाई और बसंत की शुरुआत के साथ खेत नई फसलों के लिए पूरी तरह तैयार हो जाते हैं। अगर आप पारंपरिक खेती से हटकर सब्जियों की अगेती खेती करना चाहते हैं तो यह समय आपके लिए किसी सुनहरे मौके से कम नहीं है। फरवरी में सही तकनीक और सही देखभाल के साथ लगाई गई सब्जियां मार्च के अंत तक बाजार में पहुंच जाती हैं और शुरुआती दौर में इन्हें सबसे अच्छे दाम मिलते हैं।
फरवरी क्यों कहलाता है कमाई का महीना
खेत की सही तैयारी से तय होती है पैदावार
अच्छी फसल के लिए खेत की तैयारी सबसे पहला और सबसे जरूरी कदम है। खेत की दो से तीन बार गहरी जुताई करने से मिट्टी की निचली परत ऊपर आ जाती है और धूप लगने से हानिकारक कीट नष्ट हो जाते हैं। इसके बाद अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कम्पोस्ट मिलाने से मिट्टी में जान आ जाती है। जब मिट्टी भुरभुरी और समतल होती है तो पानी रुकता नहीं और जड़ें सड़ने से बची रहती हैं।
भिंडी की अगेती खेती से मिलेगा पहला फायदा
फरवरी के मध्य में बोई गई भिंडी मार्च के अंत तक फल देना शुरू कर देती है। बुवाई से पहले बीजों को पानी में भिगोकर उपचार करने से रोगों का खतरा काफी कम हो जाता है। सही दूरी पर बोआई करने से पौधों को भरपूर धूप और हवा मिलती है जिससे फल की गुणवत्ता बेहतर होती है। शुरुआती भिंडी बाजार में हमेशा ऊंचे दाम पर बिकती है।
खीरा बोइए और गर्मी में कमाई बढ़ाइए
खीरे की खेती फरवरी में करने पर यह तेजी से बढ़ता है। मेड़ या बेड बनाकर बोआई करने से पानी की निकासी अच्छी रहती है। इस फसल को लगातार नमी की जरूरत होती है इसलिए ड्रिप सिंचाई या मल्चिंग का उपयोग फायदेमंद साबित होता है। फरवरी में लगाए गए खीरे की पहली तुड़ाई बाजार में सबसे पहले पहुंचती है और यही समय सबसे ज्यादा मुनाफा देता है।
लौकी और करेला देंगे लंबा मुनाफा
लौकी की बेल ज्यादा फैलती है इसलिए गड्ढा विधि और मचान तकनीक अपनाने से फल जमीन को नहीं छूते और उनकी चमक बनी रहती है। इसी तरह करेला भी मचान पर चढ़ाने से कीटों से सुरक्षित रहता है और तोड़ाई आसान हो जाती है। फरवरी में लगाई गई लौकी और करेला गर्मी के चरम समय तक लगातार उत्पादन देते हैं जिससे कमाई लंबे समय तक चलती रहती है।
बैंगन की समय पर रोपाई भी है फायदेमंद
अगर जनवरी में नर्सरी तैयार की गई है तो फरवरी का दूसरा सप्ताह बैंगन की रोपाई के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। शाम के समय रोपाई करने से पौधों को नमी मिलती है और वे जल्दी जम जाते हैं। सही पोषण और दूरी रखने से पौधे मजबूत होते हैं और उत्पादन भी बेहतर मिलता है।
कीट और रोग से बचाव जरूरी
जैसे जैसे गर्मी बढ़ती है वैसे वैसे कीटों का हमला भी बढ़ जाता है। नीम के तेल का नियमित छिड़काव और समय पर निराई गुड़ाई करने से फसल काफी हद तक सुरक्षित रहती है। जैविक उपाय अपनाने से न केवल खर्च कम होता है बल्कि सब्जियों की गुणवत्ता भी बनी रहती है जिससे बाजार में भरोसेमंद दाम मिलते हैं।
अगर आप फरवरी में सही योजना और मेहनत के साथ अगेती सब्जी खेती शुरू करते हैं तो मार्च से ही आपकी फसल बाजार में पहुंचने लगती है। यही वह समय होता है जब एक सही फैसला पूरी गर्मी की कमाई तय कर देता है।
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हमें फॉलो करें और हमसे जुड़े रहें।
(Follow us on social media platforms and stay connected with us.)
Youtube – https://www.youtube.com/@RoyalBulletinIndia
Facebook – https://www.facebook.com/royalbulletin
Instagram: https://www.instagram.com/royal.bulletin/
Twitter – https://twitter.com/royalbulletin
Whatsapp – https://chat.whatsapp.com/Haf4S3A5ZRlI6oGbKljJru
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
युवा और ऊर्जावान पत्रकार चयन प्रजापत 'रॉयल बुलेटिन' के लिए मध्य प्रदेश के इंदौर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। आपकी मुख्य विशेषज्ञता खेल (Sports), कृषि (Farming) और ऑटोमोबाइल (Automobile) सेक्टर में है। चयन प्रजापत इन विषयों की तकनीकी समझ के साथ-साथ ज़मीनी हकीकत को अपनी खबरों में पिरोने के लिए जाने जाते हैं। इंदौर और मालवा क्षेत्र की खबरों के साथ-साथ ऑटोमोबाइल और खेल जगत की विशेष कवरेज के लिए आप रॉयल बुलेटिन के एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं।

टिप्पणियां