सीतापुर के गांवों में बंदरों का आतंक, ग्रामीणों ने राष्ट्रपति और पीएम से लगाई मदद की गुहार
सीतापुर। सीतापुर जिले के पिसावां विकास खंड अंतर्गत गुरसंडा गांव सहित आसपास के कई गांवों में बंदरों का आतंक चरम पर है। बंदरों के झुंड द्वारा लगातार नुकसान पहुंचाए जाने से किसान, महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग सभी डर के साये में जीने को मजबूर हैं। ऐसे में अब ग्रामीणों ने राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री से मदद की गुहार लगाई है।
ग्रामीणों के अनुसार, यह समस्या पिछले कई सालों से बनी हुई है, लेकिन समस्या कम होने के बजाय उग्र रूप ले रही है। जिससे परेशान होकर गांव निवासी लाल मणि मिश्रा के नेतृत्व में तमाम ग्रामीण बीडीओ, एसडीएम और डीएम से मिलकर समस्या का समाधान कराए जाने की मांग के साथ ही मुख्यमंत्री तक को पत्र लिखकर बंदरों को पकड़वाने की मांग कर चुके हैं, लेकिन कोई हल न निकलने पर अब पीड़ित ग्रामीणों ने राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने बंदरों से होने वाले नुकसान के साथ ही लोगों को हो रही परेशानी से भी अवगत कराया है।
पूरे मामले को लेकर लालमणि मिश्रा ने बताया कि गुरसंडा, नेवदिया, मुल्ला भीरी, फर्दापुर, अमजदपुर और पिसावां सहित कई गांवों में बंदरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। बंदर खेतों में घुसकर फसलों को पूरी तरह नष्ट कर दे रहे हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और कई खेत बंजर होते जा रहे हैं।
उनका कहना है कि बंदर केवल फसलें ही नहीं उजाड़ रहे, बल्कि घरों में घुसकर सामान और कपड़े तक उठा ले जाते हैं। कई बार वे बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर हमला तक कर देते हैं। बंदरों के काटने और डर से भागने के दौरान कई लोग घायल भी हो चुके हैं। स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी-रेबीज इंजेक्शन की मांग भी बढ़ गई है।
परिषदीय विद्यालयों के शिक्षक भी शिकायत कर चुके हैं कि मिड-डे मील के दौरान बंदर स्कूल परिसर में घुस आते हैं और बच्चों पर हमला कर देते हैं, जिससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरा बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने प्रशासन को भरोसा भी दिलाया है कि वे बंदरों को पकड़वाने में हर संभव सहयोग करेंगे। उनका कहना है कि यदि बंदरों को पकड़कर जंगल में छोड़ा जाए तो किसान दोबारा खेती शुरू कर सकेंगे और अपने परिवार का भरण-पोषण कर पाएंगे।
लालमणि मिश्रा ने मांग की है कि जल्द से जल्द बंदरों को पकड़वाया जाए, ताकि गांव में शांति बनी रहे। लालमणि मिश्रा का कहना है कि यदि अब भी समस्या का समाधान न निकला तो वह उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल कर मदद की गुहार लगाएंगे। वहीं एसडीएम महोली देवेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि मामला संज्ञान में है। जल्द ही समस्या का समाधान कराया जाएगा। आमतौर पर ऐसे मामलों में बंदरों को पकड़कर जंगलों में छोड़ा जाता है। इस मामले में भी जल्द ही हल निकाला जाएगा।
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हमें फॉलो करें और हमसे जुड़े रहें।
(Follow us on social media platforms and stay connected with us.)
Youtube – https://www.youtube.com/@RoyalBulletinIndia
Facebook – https://www.facebook.com/royalbulletin
Instagram: https://www.instagram.com/royal.bulletin/
Twitter – https://twitter.com/royalbulletin
Whatsapp – https://chat.whatsapp.com/Haf4S3A5ZRlI6oGbKljJru
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

टिप्पणियां