स्मार्टफोन कंपनियों से 'सोर्स कोड' मांगने की खबर भ्रामक: आईटी मंत्रालय
नई दिल्ली। सरकार ने एक इंटरनेशनल न्यूज ऑर्गेनाइजेशन की उस रिपोर्ट को गलत बताया है, जिसमें कहा गया था कि सरकार स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों को अपना सोर्स कोड सरकार के साथ शेयर करने के लिए मजबूर करना चाहती है और इसके लिए कई सॉफ्टवेयर बदलाव करने की योजना बना रही है। इस खबर में यह भी कहा गया था कि एप्पल और सैमसंग जैसी बड़ी कंपनियां इसका विरोध कर रही हैं।
मंत्रालय लगातार ऐसे कदम उठा रहा है, जिससे तेजी से बदलते डिजिटल माहौल में यूजर्स की सुरक्षा बनी रहे और उनकी निजी जानकारी सुरक्षित रहे। मंत्रालय ने बताया, "हम नियमित रूप से सुरक्षा नियमों, इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप और अनुकूलता मानकों, भारतीय भाषाओं के समर्थन, इंटरफेस की जरूरतों और सुरक्षा मानकों जैसे विषयों पर चर्चा करते हैं। इन चर्चाओं के बाद उद्योग के साथ सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से बात होती है।" मंत्रालय ने कहा कि वह उद्योग से जुड़े लोगों के साथ मिलकर काम कर रहा है और उनकी चिंताओं को सकारात्मक तरीके से सुलझाने की कोशिश कर रहा है। इसके तहत सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय उद्योग प्रतिनिधियों से बातचीत कर रहा है, ताकि तकनीकी समस्याओं, नियमों के पालन में आने वाली दिक्कतों और दुनिया में अपनाए जा रहे अच्छे तरीकों को समझा जा सके।
मंत्रालय ने यह भी साफ किया कि उद्योग द्वारा उठाई गई सभी सही और जरूरी चिंताओं पर खुले मन से विचार किया जाएगा, ताकि देश और उद्योग दोनों के हित सुरक्षित रहें। इससे पहले, भारत के स्मार्टफोन निर्माण उद्योग ने भी सोर्स कोड शेयर करने से जुड़ी खबरों पर चिंता को कम करने की कोशिश की थी। उद्योग का कहना था कि यह मुद्दा काफी समय से चल रही बातचीत का हिस्सा है और इसका मतलब कोई नई या तुरंत लागू होने वाली नीति नहीं है। इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन (आईसीईए) ने कहा कि सरकार और उद्योग के बीच इस विषय पर कई वर्षों से चर्चा चल रही है और इसे अचानक नीति में बदलाव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
