भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की रूपरेखा तय, संयुक्त बयान जारी..जानिए इस समझौते की मुख्य शर्तें और भारतीय अर्थव्यवस्था पर इसका असर
अमेरिका ने भारतीय सामान पर टैरिफ घटाकर 18% किया, जबकि भारत अमेरिका से $500 बिलियन के सामान खरीदेगा
नई दिल्ली। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की अंतरिम रूपरेखा तय हो गई है। दोनों देशों के संयुक्त बयान में यह जानकारी दी गई। बयान के अनुसार यह समझौता दोनों देशों के बीच साझेदारी में मील का पत्थर साबित होगा। संयुक्त बयान में कहा गया है कि शुल्क (टैरिफ) कम किए जाएंगे। ऊर्जा साझेदारी नई तरह से तैयार होगी। आर्थिक सहयोग प्रगाढ़ होगा। इसका मकसद यह है कि दोनों देश मिलकर वैश्विक आपूर्ति शृंखला को दोबारा से व्यवस्थित कर सकें।
समझौते के अनुसार, भारत अमेरिका की सभी औद्योगिक वस्तुओं, सूखे अनाज, पशु आहार के लिए लाल ज्वार, मेवा, ताजा और प्रोसेस्ड फ्रूट, सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट्स समेत अन्य उत्पादों और कई प्रकार के अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों पर शुल्क समाप्त होगा या कम किया जाएगा। संयुक्त बयान में कहा गया है, '' अमेरिका और भारत को पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार के संबंध में अंतरिम समझौते की रूपरेखा तैयार करने पर खुशी हो रही है।''
नई दिल्ली से जारी इस संयुक्त बयान में कहा गया है, ''अमेरिका और भारत को यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि दोनों आपसी और पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार (अंतरिम समझौता) के संबंध में एक अंतरिम समझौते के लिए एक फ्रेमवर्क पर पहुंच गए हैं। आज का फ्रेमवर्क राष्ट्रपति डोनाल्ड जे. ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के पिछले साल 13 फरवरी को शुरू किए गए व्यापक अमेरिका-भारत द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) की बातचीत के प्रति देशों की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है। इसमें अतिरिक्त बाजार पहुंच प्रतिबद्धता शामिल होंगी और अधिक लचीली आपूर्ति शृंखला का समर्थन किया जाएगा।''
संयुक्त घोषणा के अनुसार, भारत सभी अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं और अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों की एक विस्तृत शृंखला पर टैरिफ खत्म करेगा या कम करेगा। इसमें सूखा अनाज, पशु आहार के लिए लाल ज्वार, पेड़ के मेवे, ताजे और प्रसंस्कृत फल, सोयाबीन तेल, शराब और स्पिरिट, और अतिरिक्त उत्पाद शामिल हैं।
अमेरिका ने दो अप्रैल, 2025 के कार्यकारी आदेश को संशोधित किया है। इसके तहत अमेरिका भारत के मूल उत्पादों पर 18 प्रतिशत की पारस्परिक टैरिफ दर लागू करेगा। इसमें कपड़ा और परिधान, चमड़ा और जूते, प्लास्टिक और रबर, कार्बनिक रसायन, घर की सजावट, हस्तशिल्प उत्पाद, और कुछ मशीनरी शामिल हैं। अंतरिम समझौते के के लिए पांच सितंबर, 2025 के कार्यकारी आदेश को भी संशोधित किया गया है। इसके तहत जेनेरिक फार्मास्यूटिकल्स, रत्न और हीरे, और विमान के पुर्जों पर शुल्क हट जाएगा।
अमेरिका भारत के कुछ खास विमानों और विमान के पार्ट्स पर लगाए गए टैरिफ को भी हटा देगा। साथ ही अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा जरूरतों के अनुसार, भारत को ऑटोमोटिव पार्ट्स के लिए एक प्रेफरेंशियल टैरिफ रेट कोटा मिलेगा। बयान में कहा गया है कि दोनों देश ऐसे नियम बनाएंगे जो यह सुनिश्चित करेंगे कि समझौते का फायदा मुख्य रूप से अमेरिका और भारत को ही मिले। अमेरिका और भारत उन नॉन-टैरिफ बाधाओं को दूर करेंगे जो द्विपक्षीय व्यापार को प्रभावित करती हैं। भारत अमेरिकी मेडिकल उपकरणों और अमेरिकी खाद्य और कृषि उत्पादों के व्यापार में लंबे समय से चली आ रही नॉन-टैरिफ बाधाओं को दूर करने पर भी सहमत है।
इसके अलावा अमेरिका और भारत बीटीए की बातचीत के जरिए मार्केट एक्सेस के अवसरों को और बढ़ाने की दिशा में काम करेंगे। अमेरिका इस बात की पुष्टि करता है कि वह बीटीए की बातचीत के दौरान भारत के इस अनुरोध पर विचार करेगा कि अमेरिका भारतीय सामानों पर टैरिफ कम करने के लिए काम करना जारी रखे। दोनों देश तीसरे पक्षों की गैर-बाजार नीतियों से निपटने के लिए पूरक कार्रवाई भी करेंगे।
दोनों देशों के संयुक्त बयान में कहा गया है कि भारत अगले पांच साल में अमेरिका से 45.29 लाख करोड़ रुपये (500 बिलियन डॉलर) के एनर्जी प्रोडक्ट्स, विमान और विमान के पुर्जे, कीमती धातुएं, टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स और कोकिंग कोल खरीदने का इरादा रखता है। भारत और अमेरिका टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स (ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट और डेटा सेंटर में इस्तेमाल होने वाले अन्य सामान) व्यापार को काफी बढ़ाएंगे और संयुक्त टेक्नोलॉजी सहयोग का विस्तार करेंगे। दोनों देश इस फ्रेमवर्क को तुरंत लागू करेंगे।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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