मुजफ्फरनगर दंगा 2013: हत्या और आगजनी के मामले में 23 आरोपी कोर्ट से बरी
मोहम्मदपुर रायसिंह कांड में 13 साल बाद आया फैसला; साक्ष्य के अभाव में एडीजे कोर्ट-4 ने आरोपियों को किया दोषमुक्त
मुजफ्फरनगर। जनपद के बहुचर्चित 2013 सांप्रदायिक दंगों से जुड़े एक अहम मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। भौराकलां थाना क्षेत्र के गांव मोहम्मदपुर रायसिंह में हुई हत्या, लूटपाट और आगजनी के मामले में एडीजे कोर्ट नंबर चार ने 23 आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। 13 वर्षों तक चली इस लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आए फैसले से न्यायिक गलियारों में हलचल है।
क्या था पूरा मामला:
8 सितंबर 2013 को दंगे के दौरान मोहम्मदपुर रायसिंह गांव में भीड़ ने धार्मिक नारेबाजी करते हुए एक वर्ग विशेष के घरों पर हमला कर दिया था। इस दौरान तोड़फोड़, लूटपाट और आगजनी की घटनाएं हुई थीं, जिसमें रहीसुद्दीन नामक व्यक्ति की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में दो मुकदमे दर्ज हुए थे—पहला एसआई गंगा प्रसाद द्वारा 1300 अज्ञात लोगों के खिलाफ और दूसरा मृतक के पुत्र हनीफ द्वारा हत्या व बलवे की धाराओं में दर्ज कराया गया था।
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बचाव पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता सत्येन्द्र कुमार सिंह ने दलीलें पेश करते हुए कहा कि आरोपियों के खिलाफ कोई पुख्ता सबूत नहीं मिले। एडीजे कोर्ट नंबर चार के न्यायाधीश कनिष्क कुमार ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद विक्की, बादल, मदन, जयनारायण, ब्रजवीर, विनोद, काला, प्रवीन, अनिल, सुभाष, संजीव, करण, शेर सिंह, ऋषिपाल, सहंसरपाल, प्रमोद, जगपाल, प्रेमपाल, पप्पू, नीटू, भूरा और हरेंद्र को दोषमुक्त करार दिया।
13 साल की कानूनी जंग:
बता दें कि पुलिस ने इस मामले में कुल 27 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। सुनवाई के दौरान ही चार आरोपियों—प्रवीण, नकुल, बबलू और सूरज की मौत हो गई। एक आरोपी जेल में बंद होने के कारण पेश नहीं हो सका, लेकिन अदालत ने उसे भी इस मामले में बरी कर दिया है। मोहम्मदपुर रायसिंह गांव दंगे से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक रहा था, जहां 15 अलग-अलग मुकदमे दर्ज हुए थे। अभियोजन पक्ष के आरोप साबित न होने पर अदालत ने अब सभी को बरी कर दिया है।
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