राजस्थान के सीकर में आया भूकंप, पटवारियों को जर्जर मकानों की जांच के निर्देश
नई दिल्ली। राजस्थान के सीकर जिले में शनिवार की सुबह-सुबह भूकंप के झटके महसूस किए गए। सुबह 6:32 बजे भूकंप के झटके महसूस होते ही लोग घरों से बाहर आ गए। भूकंप के झटके प्रसिद्ध धार्मिक नगरी खाटूश्यामजी, पलसाना, धींगपुर व आसपास के इलाकों में महसूस किए गए। भूकंप की तीव्रता रिएक्टर स्केल पर 3.5 दर्ज की गई है। कई जगह लगे सीसीटीवी कैमरों में भूकंप के झटकों की आवाज रिकॉर्ड हुई है। हालांकि भूकंप से किसी तरह की जान-माल की हानि नहीं हुई है। नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी के अनुसार, 7 मार्च 2026 को सुबह 6 बजकर 32 मिनट 59 सेकंड पर भूकंप दर्ज किया गया। इसका केंद्र जयपुर से लगभग 69 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थित था। भूकंप का केंद्र जमीन से करीब 5 किलोमीटर नीचे दर्ज हुआ। कम गहराई होने के कारण आसपास के क्षेत्रों में हल्के झटके महसूस हुए।
स्थानीय लोगों ने बताया कि घरों में हल्की कंपन और खिड़कियों-दरवाजों में हलचल महसूस हुई। झटके बहुत कम समय तक ही रहे, इसलिए दहशत की स्थिति नहीं बनी। दांतारामगढ़ और खाटू क्षेत्र के प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि झटके हल्के थे। श्रद्धालुओं के लिए मंदिर पूरी तरह सुरक्षित है और दर्शन की प्रक्रिया बिना किसी बाधा के जारी है। प्रशासन ने एहतियात के तौर पर स्थानीय पटवारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में पुरानी इमारतों और कच्चे मकानों की जांच करें, ताकि सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। 15 दिसंबर 2025 को भी खाटूश्यामजी के आसपास के क्षेत्र में भूकंप आया था। बार-बार आ रहे इन झटकों ने भूगर्भ वैज्ञानिकों का ध्यान इस ओर खींचा है। खाटूश्यामजी में एक युवक ने अपने मोबाइल में पंखे के हिलने का वीडियो बनाया जो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। स्थानीय लोगों का मानना है कि अरावली की पहाड़ियों के नजदीक स्थित इन क्षेत्रों में भूमिगत हलचलें बढ़ रही हैं, जिसके कारण बार-बार कंपन महसूस किए जा रहे हैं।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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