राम रहीम को हत्याकांड में बरी किए जाने पर कांग्रेस सांसद ने उठाए सवाल, भाजपा पर बोला हमला
नई दिल्ली/चंडीगढ़। डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख राम रहीम को पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में बरी किए जाने पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि अपराध चाहे जितना बड़ा हो, भाजपा की शरण में जो भी जाता है, वह चमकदार सफेदी के साथ बाहर निकलकर आता है। यह एक बार फिर साबित हो गया है। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि भाजपा की मशीन से गुजरकर राम रहीम अब साफ-सुथरे हो गए हैं और आरोपों से मुक्त होकर सामने आ गए हैं। उन्होंने कहा, "मैं न्यायालय का पूरा सम्मान करता हूं और आदर दिखाते हुए कहना चाहता हूं कि यह मुकदमा 'राम रहीम बनाम राज्य सरकार' का था। अदालत वही फैसला करेगी, जो तथ्य उसके सामने रखे जाएंगे।" उन्होंने कहा, "इस मामले में पार्टी हरियाणा सरकार थी।
अंदेशा तभी हो चुका था, जब हरियाणा चुनाव के समय राम रहीम को फरलो दे दी गई थी। इसके बाद राम रहीम का आशीर्वाद भाजपा के ऊपर हो गया था, फिर पत्रकार की हत्या हो या लड़की का बलात्कार हो, मामले साधारण हो जाते हैं।" बता दें कि पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति हत्याकांड में राम रहीम सिंह को बरी किया है। इसके साथ ही, मुख्य न्यायाधीश शील नागू और जस्टिस विक्रम अग्रवाल की पीठ ने शनिवार को सीबीआई की विशेष अदालत की ओर से 2019 में दी गई आजीवन कारावास की सजा के फैसले को पलट दिया। सीबीआई कोर्ट ने रामचंद्र छत्रपति मामले में 11 जनवरी 2019 को डेरा प्रमुख को दोषी करार दिया था। फैसला सुनाए जाने के तकरीबन 16 साल पहले यह हत्या घटी थी। 17 जनवरी 2019 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद डेरा प्रमुख और अन्य सह आरोपियों ने स्पेशल सीबीआई कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि हत्या के मामले में बरी होने के बावजूद राम रहीम जेल में ही रहेंगे, क्योंकि वे वर्तमान में बलात्कार मामले में सजा काट रहे हैं।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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