केन्द्र व प्रदेश सरकार पर बरसे राकेश टिकैत, बोले-किसानों को कमजोर ना समझें
मुजफ्फरनगर। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने जीआईसी ग्राउंड में आयोजित किसानों के धरने पर बोलते हुए केंद्र व प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा। चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि किसान इतना कमजोर नहीं कि अपने हक के लिए भी न लड़ सके। राकेश टिकैत ने कहा कि अभी किसान इतना कमजोर […]
मुजफ्फरनगर। भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने जीआईसी ग्राउंड में आयोजित किसानों के धरने पर बोलते हुए केंद्र व प्रदेश सरकार पर जमकर निशाना साधा। चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि किसान इतना कमजोर नहीं कि अपने हक के लिए भी न लड़ सके।
राकेश टिकैत ने कहा कि अभी किसान इतना कमजोर नही हुआ है, कि अपने हक की भी लड़ाई को भी न लड़ सके, अगर भाजपा सरकार के दिमाग में यह गलतफहमी पैदा हो रही है कि किसान मजबूर और कमजोर है, तो ऐसा कुछ नहीं है। किसानों को फ्री बिजली, गन्ना के भाव बढ़ाने एवं रुके हुए बिजली बिल आधे माफ करने का लॉलीपॉप देकर सत्ता तो हासिल कर ली गई, मगर चुनाव हर पांच साल बाद होते हैं। किसान अगर सरकार बनाना जानते हैं, तो उसे उखाड़ना भी जानते हैं। उन्होंने कहा कि किसानों को अपने हक के लिए जो भी कदम उठाना पड़ेगा, उसको उठाएगा और अपना हक लेकर रहेगा। अब सरकार किसानों का हक राजी-खुशी में दे या फिर आंदोलन के बाद, मगर लेकर रहेंगे अपना हक। हमारा देश कृषि प्रधान देश है, मगर किसानों का शोषण सरकार द्वारा विभिन्न प्रकार से किया जा रहा है, जो बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
रॉयल बुलेटिन से जुड़ें:
देश-प्रदेश की ताज़ा ख़बरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए हमारे सोशल मीडिया हैंडल को फॉलो करें:
आपको यह खबर कैसी लगी? अपनी राय नीचे कमेंट बॉक्स में ज़रूर दे। आपकी राय रॉयल बुलेटिन को और बेहतर बनाने में बहुत उपयोगी होगी।
संबंधित खबरें
लेखक के बारे में
रॉयल बुलेटिन के संस्थापक एवं मुख्य संपादक अनिल रॉयल ने वर्ष 1985 में मात्र 17 वर्ष की आयु से मुज़फ्फरनगर की पावन भूमि से निर्भीक और जनपक्षधर पत्रकारिता का संकल्प लिया। बीते लगभग चार दशकों से वे पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सशक्त और विश्वसनीय आवाज़ के रूप में पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं।
पत्रकारिता के अपने लंबे अनुभव के आधार पर उन्होंने वर्ष 2010 में नोएडा से रॉयल बुलेटिन के प्रिंट संस्करण का सफल विस्तार किया। समय के साथ बदलते मीडिया परिदृश्य को समझते हुए, उनके नेतृत्व में यह संस्थान आज एक मजबूत और प्रभावशाली डिजिटल समाचार मंच के रूप में स्थापित हो चुका है।
वर्तमान में रॉयल बुलेटिन की पहुँच न्यूज़ पोर्टल, फेसबुक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप सहित सभी प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर करोड़ों पाठकों तक है। प्रिंट और डिजिटल मीडिया के स्वामी एवं संपादक के रूप में अनुभव, सत्यनिष्ठा और जन-सरोकार उनकी पत्रकारिता की मूल आधारशिला रहे हैं।

टिप्पणियां