बिहार विधानसभा में 2026-27 का बजट पेश, 3.47 लाख करोड़ का प्रावधान, कृषि–शिक्षा–रोजगार पर खास जोर
पटना। बिहार सरकार के वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने मंगलवार को भोजनावकाश के बाद बिहार विधानसभा में वित्तीय वर्ष 2026-27 का वार्षिक बजट पेश किया। यह बजट कुल 3 लाख 47 हजार 589 करोड़ रुपये का है, जो पिछले वर्ष के 3.16 लाख करोड़ रुपये के बजट से कहीं अधिक है। बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि वर्ष 2025-26 में बिहार की आर्थिक वृद्धि दर 14.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है और राज्य “ज्ञान, विज्ञान और सम्मान” के पथ पर आगे बढ़ेगा।
वित्त मंत्री ने बताया कि बजट में योजना मद के लिए 1,22,155 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय 2,25,434 करोड़ रुपये रहेगा। कुल पूंजीगत व्यय 63,455.84 करोड़ रुपये रखा गया है, जो कुल बजट का 18.26 प्रतिशत है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा क्षेत्र को बजट में सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। स्कूल और कॉलेज शिक्षा के लिए 68,216 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जो किसी भी विभाग के लिए सबसे अधिक है। सड़क, पुल, बिजली, पानी और भवन निर्माण जैसे बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 63,455 करोड़ रुपये का पूंजीगत खर्च रखा गया है। स्वास्थ्य विभाग के लिए 21,270 करोड़ और ग्रामीण विकास के लिए 23,701 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
वित्त मंत्री ने घोषणा की कि मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत किसानों को केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाले 6,000 रुपये के अतिरिक्त बिहार सरकार अपनी ओर से 3,000 रुपये सालाना देगी। इस तरह किसानों को कुल 9,000 रुपये प्रतिवर्ष मिलेंगे। उन्होंने बताया कि राज्य में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 1.56 करोड़ से अधिक महिलाओं के लिए आर्थिक सशक्तिकरण को और मजबूत किया जाएगा। महिलाओं को व्यवसाय बढ़ाने के लिए 10,000 रुपये से लेकर 2 लाख रुपये तक की अतिरिक्त सहायता अथवा ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। जीविका मॉडल को रोजगार सृजन का मुख्य आधार बनाया गया है।
बजट भाषण में वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2025 से 2030 के बीच एक करोड़ रोजगार के अवसर सृजित करना है। हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचाने, गंगा जल आपूर्ति योजना के विस्तार और बिजली उत्पादन एवं खपत बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि बिहार को कृषि प्रधान राज्य मानते हुए कृषि रोडमैप-4 और रोडमैप-5 को आगे बढ़ाया गया है। दलहन, तिलहन, मक्का, फल और सब्जी उत्पादन को दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिट और एग्री-स्टार्टअप को बढ़ावा देने की भी घोषणा की गई है।
बजट में गृह विभाग (पुलिस एवं सुरक्षा) के लिए 20,132.87 करोड़ रुपये और ऊर्जा विभाग के लिए 18,737.06 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। अनुसूचित जाति के लिए 19,603 करोड़ रुपये और अनुसूचित जनजाति के लिए 1,648 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। स्वास्थ्य क्षेत्र में जिला अस्पतालों को सुपर स्पेशियलिटी स्तर तक ले जाने की योजना बनाई गई है। मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में कमी लाने का दावा किया गया है। तकनीकी और उच्च शिक्षा संस्थानों के विस्तार की भी घोषणा की गई है।
मंत्री ने बताया कि बिहार में प्रति व्यक्ति बिजली खपत बढ़कर 374 यूनिट हो गई है। सौर ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के विस्तार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। ग्रामीण सड़कों के बड़े पैमाने पर विस्तार से बिहार सड़क घनत्व के मामले में अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है।
विधानसभा में पेश बजट के अनुसार, कुल राजस्व प्राप्ति 2,85,277 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। राज्य के अपने कर से आय 65,800 करोड़ रुपये होगी, जबकि केंद्र से सहायता एवं अनुदान के रूप में 1,58,178 करोड़ रुपये प्राप्त होंगे। राजकोषीय घाटा सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) का 2.99 प्रतिशत रहेगा, जो निर्धारित सीमा के भीतर है। कुल कर्ज जीएसडीपी का 37.7 प्रतिशत है, जिसे सुरक्षित स्तर बताया गया है।
वित्त मंत्री ने कहा कि यह बजट समावेशी विकास, रोजगार सृजन और सामाजिक न्याय के लक्ष्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जिससे बिहार को विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सके।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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