राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला : नर्वस होकर प्रतियोगी परीक्षाओं में गलत कॉलम भरना गलती नहीं
-ओएमआर शीट परीक्षार्थी ने फिजिक्स की जगह भरा एग्रीकल्चर, कोर्ट से मिली राहत
जोधपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रतियोगी परीक्षाओं में ओएमआर शीट भरने में होने वाली गलतियों को लेकर एक नजीर पेश करने वाला फैसला सुनाया है। कोर्ट ने जेईटी परीक्षा में फिजिक्स की जगह गलती से एग्रीकल्चर विषय के गोले भरने वाले एक मेधावी छात्र का बीटेक. फूड टेक्नोलॉजी में एडमिशन रद्द करने का आदेश खारिज कर दिया है। जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी की कोर्ट ने इसे मानवीय भूल मानते हुए यूनिवर्सिटी को निर्देश दिया है कि छात्र को उसकी मेरिट के आधार पर तुरंत कॉलेज अलॉट किया जाए।
बाड़मेर के बायतू में लाधोनियों की ढाणी निवासी रोहित गोदारा ने 12वीं कक्षा फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी विषयों के साथ पास की थी। उसने स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईटी-2025) दी। रोहित ने परीक्षा में कट-ऑफ (59.78) से अधिक अंक प्राप्त किए और उसे डेयरी एंड फूड टेक्नोलॉजी कॉलेज, उदयपुर में बीटेक (फूड टेक्नोलॉजी) की सीट के लिए प्रोविजनल एलॉटमेंट लेटर जारी किया गया था।
सीट मिलने की खुशियां तब फीकी पड़ गईं, जब यूनिवर्सिटी ने 15 और 30 दिसंबर 2025 को आदेश जारी कर रोहित का प्रोविजनल एडमिशन रद्द कर दिया। अधिकारियों ने तर्क दिया कि रोहित के पास 12वीं में फिजिक्स विषय था, लेकिन उसने प्रवेश परीक्षा की ओएमआर शीट में फिजिक्स की जगह एग्रीकल्चर विषय का चयन कर प्रश्न हल कर दिए। नियमों के मुताबिक 12वीं के विषय और परीक्षा में हल किए गए विषयों में अंतर होने पर उम्मीदवारी खारिज कर दी जाती है। रोहित ने इसके खिलाफ रिप्रेजेंटेशन दिया और बताया कि ओएमआर शीट भरने में त्रुटि पूरी तरह से अनजाने में हुई थी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि एग्रीकल्चर के अंकों को हटा दिया जाए, तो केवल केमिस्ट्री और बायोलॉजी में उनके अंक उन्हें कट-ऑफ से ऊपर रखने के लिए पर्याप्त थे। इसके बावजूद यूनिवर्सिटी ने उनकी दलील खारिज कर दी, जिसके बाद रोहित ने हाईकोर्ट का रुख किया।
याचिकाकर्ता के वकील मनीष पटेल ने तर्क दिया कि रोहित ने इस तथ्य को छुपाया नहीं था कि उनके पास 10+2 में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी विषय थे। वकील ने कहा कि रोहित जेईटी-2025 दिशा निर्देशों में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता को पूरा करते हैं।
एडवोकेट पटेल ने यह भी कहा कि जेईटी परीक्षा में प्रश्नों को हल करते समय नर्वस होने के कारण रोहित ने अनजाने में ओएमआर-शीट में फिजिक्स के प्रश्नों को हल करते समय एग्रीकल्चर विषय वाले कॉलम में गोले भर दिए थे। वकील ने यह भी बताया कि रोहित ने परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन किया, जिसके आधार पर उन्हें काउंसलिंग के पहले दौर में भाग लेने की अनुमति दी गई थी।
गलती अनजाने में हुई थी क्योंकि रोहित ने एग्रीकल्चर विषय का कभी अध्ययन नहीं किया था, न ही 12वीं कक्षा में और न ही किसी अन्य कक्षा में, इसलिए वह जानबूझकर इसे क्यों करेगा।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस डॉ. नूपुर भाटी ने यूनिवर्सिटी की दलीलों को खारिज कर दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा कि प्रतिवादी पक्ष का यह तर्क गले नहीं उतरता कि छात्र ने जानबूझकर ऐसा किया। जिस छात्र ने कभी एग्रीकल्चर नहीं पढ़ा, वह फिजिक्स को छोडक़र एग्रीकल्चर के सवाल हल करने का जोखिम क्यों उठाएगा। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दस्तावेज से यह अनजाने में हुई गलती प्रतीत होती है। कोर्ट ने कहा कि प्रवेश परीक्षाओं के कड़े प्रतिस्पर्धी माहौल में, जहां याचिकाकर्ता ने सराहनीय प्रदर्शन किया। एक छोटी सी गलती के लिए मेधावी छात्र का भविष्य खराब नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने एग्रीकल्चर विषय के माक्र्स को मानवीय भूल मानते हुए छात्र को उसकी मेरिट रैंक (जेईटी-2025) के अनुसार सीट अलॉट करने का आदेश दिया।
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