राष्ट्रीय भक्ति पर न उठे सवाल, इसलिए हर नागरिक करे राष्ट्रीय गान और गीत का सम्मान: महंत लोकेश दास महाराज
ये भी पढ़ें बिहार विधानसभा में कानून-व्यवस्था को लेकर कांग्रेस का प्रदर्शन, नीतीश कुमार से मांगा इस्तीफाउन्होंने कहा, "मैं उनके इस फैसले का स्वागत करता हूं क्योंकि यह कोई धार्मिक गीत नहीं है, बल्कि एक राष्ट्रीय गीत है। जो इस देश में रहते हैं, उन सभी को इसको गाना चाहिए, फिर चाहे वे मंदिर में हों या फिर मदरसे में। यह सिर्फ एक गान नहीं है। इसमें भारत की आत्मा बसती है। जब हम इसे गाते हैं, तो अलग-अलग भाषाएं, अलग-अलग पहनावे और विविधता के बावजूद एकता का संदेश मिलता है।"
लोकेश दास महाराज ने सरकार का समर्थन करते हुए कहा, "मैंने कई बार देखा है कि कुछ लोग दूसरे धर्म के होने के कारण राष्ट्रगान या राष्ट्रीय गीत गाने से मना कर देते हैं। वे कहते हैं कि उनका धर्म इसकी इजाजत नहीं देता है, लेकिन मैं उनसे कहना चाहता हूं कि यह कोई धार्मिक गीत नहीं है। यह एक राष्ट्रीय गीत है, और अगर आपको भारत में रहना है, तो आपको राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय गीत का सम्मान करना चाहिए ताकि लोग आपकी राष्ट्रीय भक्ति पर आवाज न उठा सकें।"
उन्होंने यह भी जोड़ा कि कई मौकों पर देखा गया है कि कुछ लोग मंच पर राष्ट्रीय गान या राष्ट्रीय गीत के समय खड़े नहीं होते या सम्मान नहीं दिखाते। इससे लगता है कि उनके मन में भारत के प्रति श्रद्धा कम होती है। महंत ने कहा, "मैं आपसे ये अपील करना चाहता हूं कि अगर आप भारतवासी हैं, तो आपको राष्ट्रीय गान और राष्ट्रीय गीत का सम्मान करना चाहिए और जो भी इसके नियम हैं, उनको मानना चाहिए।"
उन्होंने आगे कहा कि जो लोग इसके नियम नहीं मानते, मेरी तरफ से वे एक देशद्रोही की श्रेणी में आते हैं। ऐसे लोगों को देश छोड़कर चले जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि हमारा राष्ट्रीय गीत ही वह परंपरा है जो विविधता में एकता का खूबसूरत संदेश देती है।
मदरसों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि मदरसों में भी 'वंदे मातरम' बजाया और गाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, "मदरसे भी भारत के अंदर आते हैं। वे भी हमारे देश के नागरिक हैं। कई लोग उनके देशभक्ति पर संदेह करते हैं। अगर वहां राष्ट्रीय गान चलेगा तो उनके ऊपर से ऐसे संदेह खत्म होंगे।"
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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