'खामोशियां डायलॉग से ज्यादा बोलती हैं', 'तस्करी' के ग्रे किरदार पर नंदीश संधू का खुलासा
मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता इमरान हाशमी की नई वेब सीरीज 'तस्करी' इन दिनों काफी चर्चा में है। यह सीरीज कानून और अपराध के बीच की धुंधली रेखा को दिखाती है। इसमें अभिनेता नंदीश संधू एक ऐसे किरदार में नजर आएंगे, जो बाहर से सख्त, भीतर से उलझा और हालात से जूझ रहा है। दमदार निर्देशन, गहरी रिसर्च और शानदार अभिनय से सजी इस सीरीज को लेकर नंदीश संधू ने खुलकर बात की।
समकालीन सिनेमा और नैतिक रूप से धुंधले किरदारों की तैयारी पर बात करते हुए नंदीश ने कहा, ''मुझे ऐसे ही किरदार सबसे ज्यादा पसंद आते हैं, जिनकी खामोशियां डायलॉग से ज्यादा बोलती हों। जब किरदार सिर्फ अच्छे या बुरे में बंटे हों, तो अभिनय सीमित हो जाता है, लेकिन जब उनके भीतर विरोधाभास, चुप्पियां और अनकहे भाव होते हैं, तभी असली अभिनय की गुंजाइश बनती है।'' उन्होंने बताया कि 'तस्करी' में उन्हें लेखन और निर्देशन टीम से भरपूर सहयोग मिला। स्क्रिप्ट में उनके किरदार की असुरक्षाएं, डर और कमजोरियां साफ तौर पर लिखी थीं। इसके अलावा, कलाकारों को असली कस्टम अधिकारियों से मिलने का मौका दिया गया। इससे किरदार को समझने में काफी मदद मिली। सह-निर्देशक राघव के साथ काम करने के अनुभव पर नंदीश ने कहा, ''वह बेहद स्पष्ट सोच वाले निर्देशक हैं। उनकी तैयारी और रिसर्च में कोई कमी नहीं थी। सेट पर हर सवाल का सटीक जवाब मिलता था, जिससे काम करना आसान और संतोषजनक हो गया।''
अपने किरदार के बारे में नंदीश ने कहा, ''कहानी में हर एक कदम के पीछे ठोस वजह है। कुछ भी यूं ही नहीं होता। ट्रेलर में दिखने वाले भावनात्मक और एक्शन सीन्स इस बात का संकेत देते हैं कि हर किरदार अपने हालात और सोच के अनुसार फैसले लेता है। मेरा किरदार किसी एक पक्ष में खड़ा नजर नहीं आता, बल्कि उसकी परतें धीरे-धीरे खुलती हैं।'' चुनौतीपूर्ण दृश्यों के बारे में नंदीश ने कहा, ''सीरीज में एक इमोशनल सीन ऐसा था, जिसे एक बेहद थकाऊ एक्शन सीन के तुरंत बाद फिल्माया गया। रात की शूटिंग, बिना आराम के, शारीरिक और मानसिक थकान के बावजूद उस सीन ने एक अलग ही सच्चाई पकड़ी। निर्देशक नीरज पांडे अंडरटोन और साइलेंस पर खास ध्यान देते हैं, जो कलाकार को अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकालता है।''
