मौसम बदलते ही बच्चे क्यों पड़ते हैं बीमार? जानिए बचाव का आसान तरीका
नई दिल्ली। मौसम जब करवट बदलता है, तो सबसे पहले असर बच्चों की सेहत पर दिखाई देता है। सुबह ठंडी हवा, दोपहर में हल्की गर्मी और शाम को फिर ठंडक- यह बदलाव बच्चों के नाजुक शरीर को जल्दी थका देता है।
आयुर्वेद और विज्ञान दोनों मानते हैं कि इस समय बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता थोड़ी कमजोर हो जाती है, जिससे सर्दी-जुकाम, बुखार, खांसी और गले की परेशानी बढ़ सकती है। ऐसे में रोजमर्रा की आदतों पर ध्यान देना सबसे जरूरी होता है। आयुर्वेद के अनुसार, शरीर का संतुलन बिगड़ने पर बीमारियां शुरू होती हैं, जबकि विज्ञान की मानें तो, कमजोर इम्यून सिस्टम की वजह से वायरस और बैक्टीरिया आसानी से शरीर पर पकड़ बना लेते हैं। अगर बच्चों की अंदरूनी ताकत मजबूत रहे, तो वे बीमारी से दूर बने रहते हैं। सबसे पहले बच्चों के खान-पान का ध्यान रखें। बच्चों को हल्का, ताजा और पोषण से भरपूर खाना देना चाहिए। हरी सब्जियां, मौसमी फल, दालें, चावल, रोटी और दूध बच्चों के शरीर को ताकत देते हैं। विज्ञान भी मानता है कि विटामिन, मिनरल और प्रोटीन इम्यून सिस्टम को मजबूत बनाते हैं। ज्यादा तला-भुना और बाहर का खाना बच्चों के पेट को कमजोर करता है, जिससे बीमारी जल्दी पकड़ लेती है।
गुनगुना पानी या हल्का सूप देने से शरीर अंदर से गर्म रहता है। साफ-सफाई की आदत भी बच्चों को बीमारियों से बचाती है। ज्यादातर कीटाणु हाथों के जरिए शरीर में प्रवेश करते हैं। बच्चों को समझाएं कि खाना खाने से पहले, बाहर खेलकर आने के बाद और बाथरूम के बाद हाथ धोना क्यों जरूरी है। साफ हाथ बच्चों को कई संक्रमणों से बचा सकते हैं और यह आदत उन्हें जीवन भर स्वस्थ रखने में मदद करती है। शरीर में पानी की कमी भी बच्चों को कमजोर बनाती है। शरीर को अंदर से साफ रखने के लिए तरल पदार्थ जरूरी हैं। बच्चों को दिन भर थोड़ा-थोड़ा पानी पिलाते रहें। नारियल पानी, छाछ या घर का बना फलों का रस शरीर को ठंडा-संतुलित रखता है और विषैले तत्वों को बाहर निकालता है। अच्छी नींद बच्चों की सेहत के लिए बेहद जरूरी है। दरअसल, नींद के दौरान शरीर खुद को ठीक करता है। अगर बच्चे पूरी नींद लेते हैं, तो उनका शरीर बीमारियों से लड़ने के लिए तैयार रहता है। रोजाना तय समय पर सोना और जागना बच्चों की आदत बन जाए, तो उनका मन और शरीर दोनों स्वस्थ रहते हैं।
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लेखक के बारे में
रविता ढांगे 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज़ एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और डिजिटल न्यूज़ डेस्क के प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। उन्होंने अपने पेशेवर करियर की शुरुआत 'समाचार टुडे' से की थी, जहाँ उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों और न्यूज़ ऑपरेशन्स के बुनियादी सिद्धांतों को सीखा।
रविता ढांगे की सबसे बड़ी विशेषता उनकी मजबूत तकनीकी पृष्ठभूमि है; उन्होंने BCA, PGDCA और MCA (Master of Computer Applications) जैसी उच्च डिग्रियां प्राप्त की हैं। उनकी यह तकनीकी विशेषज्ञता ही 'रॉयल बुलेटिन' को डिजिटल रूप से सशक्त बनाती है। वर्ष 2022 से संस्थान का अभिन्न हिस्सा रहते हुए, वे न केवल खबरों के संपादन में निपुण हैं, बल्कि न्यूज़ एल्गोरिदम और डेटा मैनेजमेंट के जरिए खबरों को सही दर्शकों तक पहुँचाने में भी माहिर हैं। वे पत्रकारिता और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के बेहतरीन संगम का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिससे पोर्टल की डिजिटल रीच और विश्वसनीयता में निरंतर वृद्धि हो रही है।

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