Wednesday, July 17, 2024

मुरादाबाद की प्राइवेट यूनीवर्सिटी में एक माह में तीन मौतें, प्रशासन सवालों के घेरे में

मुरादाबाद- उत्तर प्रदेश की चर्चित तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी (टीएमयू) से फिर एक बार सुसाइड का मामला सामने आया है। गुरुवार को यहां एमबीबीएस छात्र की संदिग्धावस्था में मौत हो गई। एक महीने में इस यूनीवर्सिटी में हुआ मौत का यह तीसरा मामला है लेकिन तीनों घटनाओं में समानता यह है कि सुसाइड नोट किसी में भी नहीं मिला।


पुलिस अधीक्षक (नगर) अखिलेश भदौरिया ने गुरुवार को बताया कि आज़ तड़के सूचना मिली थी कि थाना पाकबड़ा क्षेत्र में दिल्ली रोड़ स्थित एक निजी यूनिवर्सिटी ( तीर्थंकर महावीर यूनिवर्सिटी) टीएमयू के एनेस्थीसिया डिपार्टमेंट के छात्र ओशो राज उर्फ़ बसु छात्र की लाश कमरे में फंदे पर लटकी मिली। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। घटना के बारे में मृतक छात्र के परिजनों को सूचना दे दी गई है।

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एसपी सिटी ने बताया कि झारखंड में रांची निवासी ओशोराज से जुड़ी घटना की तहकीकात की जा रही है। बताया जा रहा है कि ओशो राज एमबीबीएस करने के बाद टीएमयू से एमडी एनेस्थीसिया पीजी की पढ़ाई कर रहा था।गुरुवार सुबह लगभग साढ़े आठ बजे उसका शव फंदे से लटका मिला है। झारखंड रांची के ओल्ड एमबी रोड़ कत्थार टोली निवासी ओशो राज चौधरी अपने माता-पिता की इकलौती संतान था। पिता डॉ अपूर्व चौधरी झारखंड में सीएमओ थे उनकी मृत्यु पहले ही हो चुकी है। जबकि ओशो राज की मां पूनम चौधरी रांची गवर्नमेंट इंटर कॉलेज की प्रिंसिपल हैं।


टीएमयू लगातार सवालों के घेरे में रही है और इस बार तो एक माह के अंतराल में यह तीसरी मौत है। अभी चार दिन पहले यानी एक जुलाई 24 को यूनिवर्सिटी के गेस्ट हाउस में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ अदिति मेहरोत्रा की लाश फर्श पर पड़ी मिली थी। पुलिस ने लाश का मुआयना करने के बाद जो खुलासा किया वो कहीं ज्यादा हैरतअंगेज था क्योंकि महिला प्रोफेसर की संदिग्धावस्था में मौत को आत्महत्या क़रार दिया था। हालांकि पुलिस की जांच चल रही है। विसरा सुरक्षित रख लिया गया है। महिला प्रोफेसर द्वारा अपनी गर्दन पर चाकू मारकर खुदकुशी करने की जो बात बतायी जा रही है, ये बात लोगों के गले नहीं उतर रही। दूसरी ओर अभी तक पुलिस ने यह पुष्टि नहीं की है कि डॉ अदीति मेहरोत्रा के पास से कोई सुसाइड नोट मिला है।साथ ही खुदकुशी की वज़ह भी सामने नहीं आई है।


गौरतलब है कि डॉ अदिति मेहरोत्रा हरियाणा के रेवाड़ी जिले की निवासी थीं और मौत से 15 पंद्रह दिन पहले यानी 16 जून,24 को इस निजी यूनिवर्सिटी में नौकरी ज्वाइन की थी। पिछले दो हफ्तों से वह यूनिवर्सिटी के गेस्ट हाउस में ही रह रही थीं।मगर ज्वाइनिंग के 15 दिन बाद ही ये घटना घट गई। डॉ अदिति के पिता डॉ नवनीत मेहरोत्रा ने पत्रकारों को बताया था कि वारदात वाली रात बेटी द्वारा काॅल रिसिव नहीं करने से ही उन्हें किसी अनहोनी की आशंका हुई थी। डॉ़ मेहरोत्रा ने बेटी के बारे में यूनिवर्सिटी प्रबंधन से बात करनी चाही तो उनका भी फोन नहीं उठा।


इस संबंध में डाक्टर अदिति के पिता का कहना है कि उनकी बेटी कभी भी आत्महत्या नहीं कर सकती। उन्होंने कहा कि जबतक विसरा रिपोर्ट न आ जाए या कोई सुसाइड नोट न मिले तब तक पुलिस इस संदिग्ध मौत को सुसाइड कैसे कह सकती है। इससे पूर्व पिछले महीने 09 जून को उत्तर प्रदेश आगरा निवासी बीबीए छात्र अक्षत जैन की लाश भी यूनिवर्सिटी में फंदे से लटकी हुई मिली थी।अक्षत जैन के पिता ने भी तत्कालीन एसएसपी हेमराज मीणा से मिलकर बेटे की संदिग्धावस्था में मौत की निष्पक्ष जांच की गुहार लगाई थी।उनका कहना था कि अक्षत जैन सुसाइड नहीं कर सकता। और न ही उसके पास कोई सुसाइड नोट मिला था।


इससे पूर्व 06 जुलाई 2013 में हरियाणा फरीदाबाद निवासी एमबीबीएस छात्रा नीरज भड़ाना की मर्डर मिस्ट्री की गुत्थी सुलझाने तथा शिक्षण संस्थान में इस तरह की मौतों को लेकर संसद में भी मुद्दा उठ चुका है। अमरोहा से निवर्तमान सांसद तथा कांग्रेस नेता कुंवर दानिश अली द्वारा यूनिवर्सिटी में मौतों का मामला उठाया था। एमबीबीएस छात्रा नीरज भड़ाना के चाचा ज्ञानचंद भड़ाना ने हाल की घटनाओं को लेकर कहा कि नीरज भड़ाना के साथ दुष्कर्म के बाद हत्या का मुकदमा थाना पाकबड़ा में दर्ज कराया गया था, जिसमें यूनिवर्सिटी के सर्वेसर्वा सुरेश जैन के बेटे मनीष जैन को नामजद कराया गया था। वीवीआईपी मूवमेंट वाले उक्त शिक्षण संस्थान में न जाने कितनी घटनाएं दफ़न हो कर रह गई हैं। यदि नीरज भड़ाना को न्याय मिल गया होता तो इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होती।


पीतल नगरी के नाम से मशहूर उत्तर प्रदेश का मुरादाबाद अब धीरे-धीरे यूनिवर्सिटीज़ का हब बन चुका है। केवल एक निजी यूनिवर्सिटी में ही इस तरह की सनसनीखेज घटनाएं होना सवाल खड़े करता है। 03 जुलाई को अपना दल (कमेरा वादी) के मंडलाध्यक्ष डॉ रामेश्वर तुरैहा के नेतृत्व में सैकड़ों लोगों ने डीएम कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन कर इस संबंध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम एक ज्ञापन डीएम कार्यालय में सौंपा।
इस परिस्थिति में यूनिवर्सिटी में पढ़ने या काम करने वाले मृतकों के परिजन अपने बच्चों को न्याय मिलने की आस लगाये बैठे हैं और दूसरी ओर इस संस्थान में मौतों का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा है।

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