शंकराचार्य का सीधा वार: 'योगी 40 दिन में हिंदू होने का प्रमाण दें, वरना मानेंगे दिखावे के लिए पहना गेरुआ'
"नकली हिंदू होने का लगेगा ठप्पा"
वाराणसी में मीडिया से मुखातिब शंकराचार्य ने तीखे शब्दों में कहा:
"हम आपको 40 दिन का समय दे रहे हैं। इस दौरान आप अपने गौ-भक्त होने का प्रमाण दीजिए। यदि गौ-माता को राज्यमाता का दर्जा नहीं मिला और गौमांस निर्यात पर रोक नहीं लगी, तो यह माना जाएगा कि आप नकली हिंदू हैं और आपने केवल दिखावे के लिए गेरुआ वस्त्र धारण किया है।"
प्रशासनिक 'मैनेजमेंट' को नकारा
प्रयागराज में हुए कथित लाठीचार्ज और विवाद को लेकर शंकराचार्य ने प्रशासनिक सुविधाओं के प्रस्तावों को कचरे के डिब्बे में डाल दिया। उन्होंने कहा:
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ठुकराए प्रस्ताव: प्रशासन ने हेलीकॉप्टर से फूल बरसाने और विशेष स्नान के लिए अलग SOP (मानक संचालन प्रक्रिया) बनाने का लालच दिया था।
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शंकराचार्य की शर्त: "हमें फूल नहीं, पश्चाताप चाहिए। संतों, ब्रह्मचारियों और माताओं पर जो लाठियां चली हैं, उसके लिए सरकार को सार्वजनिक रूप से वास्तविक क्षमा मांगनी होगी।"
धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ का आरोप
शंकराचार्य ने स्पष्ट किया कि आस्था का समाधान वीआईपी सुविधाओं से नहीं, बल्कि विनम्रता से होता है। उन्होंने बताया कि प्रयागराज से रवानगी के वक्त ही उन्होंने लिखित रूप में प्रशासन को अपनी आपत्तियां दर्ज करा दी थीं।
चर्चा के केंद्र में '40 दिन'
संत समाज और राजनीतिक गलियारों में शंकराचार्य के इस अल्टीमेटम के बाद खलबली मची है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या सरकार संतों की नाराजगी दूर करने के लिए उनकी शर्तों के आगे झुकेगी या फिर यह टकराव और बढ़ेगा।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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