काशी में बोले धीरेंद्र शास्त्री: शंकराचार्य के संकल्पों के साथ हूं, गौ रक्षा के लिए हर सनातनी को होना होगा खड़ा
वाराणसी। बागेश्वर धाम के प्रसिद्ध कथावाचक पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री शुक्रवार छह मार्च को वाराणसी पहुंचे। काशी की पावन धरा पर मत्था टेकने के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए उन्होंने महादेव की नगरी को अविनाशी और दिव्य बताया। इस दौरान उन्होंने धार्मिक और सामयिक मुद्दों पर खुलकर अपनी बात रखी, हालांकि कुछ विवादित विषयों पर बेहद संतुलित रुख अपनाया।
शंकराचार्य के प्रति जताया सम्मान
ज्योतिष्पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के साथ पूर्व में रहे वैचारिक मतभेदों के सवाल पर धीरेंद्र शास्त्री ने बहुत ही विनम्रता से जवाब दिया। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य जैसे महान संतों पर टिप्पणी करना उनकी क्षमता और दायरे से बाहर की बात है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गौ रक्षा, सनातन धर्म की रक्षा और मां गंगा की शुद्धि जैसे जो अद्भुत संकल्प शंकराचार्य जी ने लिए हैं, वे पूरी तरह उनके साथ हैं। उन्होंने आह्वान किया कि भारत के प्रत्येक सनातनी को इन पवित्र उद्देश्यों के लिए एकजुट होकर खड़ा होना चाहिए।
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आगामी ग्यारह मार्च को लखनऊ में आयोजित होने वाली बड़ी सभा के संबंध में पूछे गए सवाल पर बागेश्वर बाबा ने कहा कि उन्हें फिलहाल इस कार्यक्रम का कोई औपचारिक निमंत्रण प्राप्त नहीं हुआ है। उनके इस बयान से उन अटकलों पर विराम लग गया है जिनमें उनकी लखनऊ मौजूदगी की चर्चाएं हो रही थीं।
टीम इंडिया की जीत पर दी बधाई
आध्यात्मिक चर्चा के साथ-साथ धीरेंद्र शास्त्री ने खेल जगत की सफलता पर भी खुशी जाहिर की। भारत के टी-20 वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचने पर उन्होंने पूरे देश को बधाई दी। उन्होंने कहा कि भारत हर क्षेत्र में तरक्की कर रहा है और यह हर भारतीय के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने भारतीय खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए बाबा विश्वनाथ और बागेश्वर बालाजी से उनकी विजय की प्रार्थना की।
काशी यात्रा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री के बदले हुए और सौम्य तेवरों ने चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है, खासकर शंकराचार्य के प्रति उनके सम्मानजनक शब्दों को सनातन एकता की दिशा में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।
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