यूजीसी की नई गाइडलाइंस पर संत समाज में आक्रोश, सरकार से की अपील
वाराणसी। यूजीसी यानी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की नई गाइडलाइंस के बाद से ही लगातार आरोप लग रहे हैं कि यह हिंदू समाज और ऊंची जातियों के युवाओं के साथ भेदभाव को दिखाता है। झूठे आरोप लगाने वालों के खिलाफ भी किसी तरह की कार्रवाई का प्रावधान नहीं रखा गया है। अब यूजीसी को लेकर संत-समाज में भी आक्रोश देखने को मिल रहा है। अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेन्द्रनंद सरस्वती ने पीएम मोदी से नई गाइडलाइंस बनाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
अखिल भारतीय संत समिति के महामंत्री स्वामी जितेन्द्रनंद सरस्वती ने नई गाइडलाइंस को लेकर कहा, "ये नई नियमावली भेदभाव वाली है और हिन्दू समाज को कई वर्गों में बांटने वाला फैसला है। हमारी समिति को यह नियमावली स्वीकार्य नहीं है और हम इसका विरोध करते हैं। संविधान ने सभी को समानता का अधिकार दिया है, लेकिन क्या यूजीसी की नई नियमावली इसे पूरा करती है?"उन्होंने कहा, "ऐसे में राष्ट्र के युवा के मन में भेदभाव की भावना को इस कदर भरा जा रहा है कि आने वाले समय में झूठी शिकायतों को लेकर भी कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। ऊंची जाति में जन्म लेना अपराध है।" उन्होंने कहा, "जिन लोगों ने भेदभाव करने वाली नियमावली बनाई है। चाहे वे यूजीसी के अध्यक्ष हों या शिक्षा मंत्रालय से जुड़े अधिकारी, सभी से इस्तीफा लेना चाहिए और हिंदुओं को बांटने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। हमारा देश एक राष्ट्र, एक मन और एक जीवन के नियमों पर चलता है।"
बता दें कि एसटी, एससी, ओबीसी, महिला और दिव्यांग छात्रों के साथ होने वाले भेदभाव को कम करने और निष्पक्ष जांच के लिए यूजीसी ने पुराने नियमों में बदलाव करते हुए इस साल इक्विटी इन हायर एजुकेशन रेगुलेशंस लागू किया है, जिसके लिए दो अलग केंद्र और कमेटी का गठन किया गया है। इसको लेकर विरोध हो रहा है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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