भारत पर लगाया गया अतिरिक्त अमेरिकी शुल्क आज से खत्म, गोयल ने कहा-किसानों और मछुआरों को फायदा
नई दिल्ली। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को यहां आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के रूपरेखा की घोषणा पर सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि मार्च के मध्य तक इसपर हस्ताक्षर की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि उत्पाद अमेरिका में जीरो टैरिफ पर निर्यात किए जाएंगे, जबकि अमेरिका के कृषि उत्पादों को भारत में कोई टैरिफ छूट नहीं दी गई है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री ने कहा कि भारत ने अंतरिम व्यापार समझौते के तहत अमेरिका को सेब पर कोटा-आधारित शुल्क रियायत दी है, जबकि घरेलू सेब उत्पादकों के हितों को पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है। प्रस्तावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत भारत ने अमेरिका से आने वाले सेब पर 80 रुपये प्रति किलोग्राम का न्यूनतम आयात मूल्य (एमआईपी) और 25 फीसदी आयात शुल्क लगाया है। इसका प्रभावी अर्थ यह है कि अमेरिका से 100 रुपये प्रति किलोग्राम से कम कीमत वाले सेब का आयात नहीं किया जा सकता।
गोयल ने कहा, "देश में कुछ लोग ऐसे हैं, जो किसान हितों के खिलाफ हैं। वे देश की जनता को गुमराह करते हैं। वे यह देखकर हैरान हैं कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया है जो देश के किसानों के हितों के खिलाफ हो।" केंद्रीय वाणिज्य मंत्री ने कहा कि इस समझौते के तहत अमेरिका को होने वाले भारतीय निर्यात पर लगने वाला 50 फीसदी का टैरिफ घटाकर सिर्फ 18 फीसदी कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि 18 फीसदी शुल्क हमारे सभी पड़ोसी देशों और दूसरे देशों द्वारा लगाए गए टैरिफ से कम है, जिनके साथ हम मुकाबला करते हैं और इससे आने वाले दिनों में हमें और हमारे एक्सपोर्टर्स को बहुत फायदा होगा। कई ऐसी चीज़ें हैं जिन पर अब हमारे एक्सपोर्टर जब अमेरिका सामान भेजेंगे तो ज़ीरो ड्यूटी लगेगी।
उल्लेखनीय है कि भारत और अमेरिका ने शुक्रवार को अंतरिम व्यापार समझौते (आईटीए) की रूपरेखा जारी की। इसके तहत भारतीय सामान पर अमेरिका का टैक्स 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी कर दिया गया है, जिसमें रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर लगाया गया 25 फीसदी अतिरिक्त टैक्स भी शामिल है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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