घटते जन्मदर से घबराया चीन, महिलाओं को ज्यादा बच्चे पैदा करने के लिए कर रहा प्रोत्साहित: रिपोर्ट
नई दिल्ली। कभी वन चाइल्ड पॉलिसी को लेकर बेहद सख्त रहे चीन अपने रवैए में बदलाव ला रहा है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार महिलाओं से अपील की जा रही है कि वो ज्यादा बच्चे पैदा करें। म्यांमार स्थित मेकांग न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले चार दशक में जन्म दर को महिलाओं ने नहीं, बल्कि सरकार ने तय किया है। जहां 1979 में वन चाइल्ड पॉलिसी में जनसंख्या वृद्धि पर रोक लगाने का लक्ष्य रखा गया था, वहीं अब देश में महिलाओं पर अधिक बच्चे पैदा करने का दबाव डाला जाना शुरू हो गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि देश की जनसंख्या में भारी गिरावट देखी गई है। जनवरी में जारी आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो स्थिति स्पष्ट होती है।
2025 में 7.92 मिलियन शिशु जन्मे, जो 2024 के 9.54 मिलियन से 1.62 मिलियन (लगभग 17 फीसदी) कम है। जन्म दर 5.63 प्रति 1,000 व्यक्ति रह गई, जो रिकॉर्ड निचला स्तर है। यह 1949 के बाद से सबसे कम स्तर है, जब चीन में आधुनिक जनगणना रिकॉर्ड शुरू हुए थे। रिपोर्ट में कहा गया है, "बीजिंग अभी भी बच्चों की पैदाइश को व्यक्तिगत स्वतंत्रता के रूप में नहीं बल्कि आर्थिक योजना के एक साधन के रूप में देखता है।" इस रिपोर्ट के अनुसार, "विकास के लिए, आय बढ़ाने और देश पर दबाव कम करने" के लक्ष्य के साथ, एक-बच्चा नीति ने कई महिलाओं को उनकी इच्छाओं से महरूम रखा। उन्हें जबरन गर्भपात के लिए मजबूर किया, नसबंदी कराई, और शारीरिक-मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने लोकतांत्रिक तरीके से नहीं बल्कि जोर-जबरदस्ती से लोगों को अपनी बात मानने को मजबूर किया।
इस रिपोर्ट में बेटों की चाहत का भी जिक्र है। लिखा गया है कि बेटा पाने की इच्छा ने देश के लिंगानुपात पर भी असर डाला। चीन ने 2016 में वन चाइल्ड पॉलिसी खत्म कर दी और टू चाइल्ड पॉलिसी अपनाई। बाद में जन्म दर में गिरावट जारी रहने पर इसे थ्री-चाइल्ड पॉलिसी तक बढ़ा दिया। रिपोर्ट में कहा गया है, "चीन की नीति में बदलाव का भ्रम एक गहरी समस्या को उजागर करता है: व्यक्तिगत इच्छा को बढ़ावा देने के बजाय, सरकार ने आर्थिक मजबूरी के चलते अपनी नीति को थोपना शुरू कर दिया है।" एक तरफ सरकार जन्म दर बढ़ाने की सलाह दे रही है, तो वहीं कई जोड़ों को बढ़ती महंगाई, करियर, जिम्मेदारियों और वर्कप्लेस पर लिंग आधारित भेदभाव के चलते रिस्क लेने से बचना चाहते हैं। खास बात यह है कि लिंग अनुपात के कारण, चीन में अब बच्चे पैदा करने वाली महिलाओं (बढ़ी उम्र के कारण) की संख्या में भी कमी आई है। रिपोर्ट में कहा गया है, ''भले ही सरकार अब बच्चे पैदा करने के लिए कह रही है, महिलाएं अभी भी नीतिगत सीमाओं में फंसी हुई हैं।''
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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