यूपी के वाहन चालकों को बड़ा झटका, 1 जनवरी 2026 से नया कानून लागू , मुज़फ्फरनगर के वाहन चालकों को जाना होगा किरतपुर
मुज़फ्फरनगर (Muzaffarnagar) नया साल यूपी समेत मुजफ्फरनगर के लाखों वाहन स्वामियों के लिए राहत के बजाय बड़ी मुसीबत लेकर आया है। केंद्र सरकार के सख्त निर्देशों के बाद, 1 जनवरी 2026 से मुजफ्फरनगर सहित यूपी के 35 जिलों में वाहनों की मैनुअल फिटनेस जांच (Manual Fitness Test) का युग समाप्त हो गया। अब आरटीओ (RTO) या एमवीआई (MVI) अपनी मर्जी से फिटनेस सर्टिफिकेट जारी नहीं कर पाएंगे। इस कानून के लागू होने के बाद आप बिना फिटनेस कराये वाहन सड़क पर निकले तो आपकी खैर नहीं होगी।
भारत सरकार के सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने उत्तर प्रदेश के 35 जिलों में वाहनों की मैनुअल फिटनेस जांच समाप्त करने का आदेश जारी किया है। इस क्रम में मुजफ्फरनगर जनपद में भी 1 जनवरी 2026 से आरटीओ और एमवीआई द्वारा मैनुअल फिटनेस टेस्ट एवं फिटनेस प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया पूरी तरह बंद कर दिया गया है। यह आदेश भारत सरकार के पत्रांक संख्या RT-23013/2/2023-T, दिनांक 17 नवंबर 2025 के माध्यम से जारी किया गया है। यह पत्र परिवहन भवन, संसद मार्ग, नई दिल्ली स्थित मंत्रालय से उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव (परिवहन) को संबोधित किया गया है।
मंत्रालय की ओर से यह आदेश यतेन्द्र कुमार (Yatendra Kumar ), अवर सचिव (Under Secretary), भारत सरकार द्वारा जारी किया गया है। पत्र में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि यह निर्णय केंद्रीय मोटर वाहन नियम, 1989 के नियम-62 में किए गए संशोधनों के अनुपालन में लिया गया आदेश में भारत सरकार के गजट नोटिफिकेशन GSR 663(E) दिनांक 12 सितंबर 2023 तथा GSR 709(E) दिनांक 14 नवंबर 2024 का स्पष्ट उल्लेख है, जिनके तहत यह अनिवार्य किया गया है कि 1 अप्रैल 2025 के बाद सभी परिवहन वाहनों की फिटनेस जांच केवल ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) के माध्यम से ही की जाएगी।
पत्र में कहा गया है कि जिन जिलों की भौगोलिक सीमाएं उन जिलों से जुड़ी हैं, जहाँ ATS पहले से संचालित हैं, वहाँ आरटीओ/एमवीआई का Parivahan सिस्टम एक्सेस रद्द किया जाएगा। इसी आधार पर मुजफ्फरनगर को 35 जिलों की सूची में शामिल किया गया है।
पत्र में केंद्रीय मोटर वाहन नियम 181(9) का हवाला देते हुए कहा गया है कि देश में पंजीकृत कोई भी वाहन किसी भी राज्य के ATS पर फिटनेस जांच करा सकता है, जिससे वाहन स्वामियों को सुविधा मिलेगी। वाहन स्वामियों के मुताबिक मुज़फ्फरनगर के लिए बिजनौर के किरतपुर जाकर फिटनेस करानी होगी।
स्कूल संचालकों और ट्रांसपोर्टर्स की बढ़ी धड़कनें
सबसे बड़ी मार स्कूली बसों और छोटे व्यवसायिक वाहनों पर पड़ने वाली है। स्कूल संचालकों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है—"बच्चे पढ़ाएं या किरतपुर में लाइन लगाएं?"
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दूरी की मार: मुजफ्फरनगर से किरतपुर (बिजनौर) जाने-आने में पूरा दिन बर्बाद होगा।
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आर्थिक बोझ: डीजल का अतिरिक्त खर्चा और वहां लगने वाला समय ट्रांसपोर्टर्स की कमर तोड़ देगा।
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भीड़ का दबाव: चूंकि मुजफ्फरनगर के साथ-साथ अन्य जिलों के वाहन भी उन्हीं चुनिंदा स्टेशनों (ATS) पर पहुंचेंगे, ऐसे में हफ्तों तक नंबर न आने की आशंका है।
अब अगर वाहन मशीन (ATS) से पास नहीं हुआ, तो अधिकारी चाहकर भी सिस्टम में फिटनेस अपडेट नहीं कर पाएंगे। मानवीय हस्तक्षेप शून्य होने से उन पुराने वाहनों का सड़क पर चलना मुश्किल हो जाएगा, जिनमें छोटी-मोटी तकनीकी खामियां हैं।
क्या हैं चुनौतियां?
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किरतपुर सेंटर पर निर्भरता: मुजफ्फरनगर का अपना कोई सरकारी या निजी ATS फिलहाल चालू नहीं है। किरतपुर का सेंटर प्राइवेट हाथों में है, जहाँ भारी भीड़ होने की पूरी संभावना है।
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मैनुअल सिस्टम का अंत: अब तक एमवीआई (MVI) मौके पर वाहन देखकर फिटनेस कर देते थे, जिससे स्थानीय स्तर पर काम आसान रहता था।
पुराने वाहनों के लिए 'रेड अलर्ट'
यह नया कानून पुराने और खटारा वाहनों के लिए किसी झटके से कम नहीं है।
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अनफिट यानी कबाड़: यदि मशीन ने वाहन को फेल कर दिया, तो उसे ठीक कराने के लिए निश्चित समय मिलेगा। दोबारा फेल होने पर वाहन का पंजीकरण निरस्त किया जा सकता है।
मशीन से जांच: क्या-क्या चेक होगा?
अब तक फिटनेस जांच में अधिकारी केवल बाहरी तौर पर वाहन को देखते थे, लेकिन ATS में तकनीक का बोलबाला होगा। सेंसर और कैमरों के जरिए निम्नलिखित बिंदुओं की बारीकी से जांच होगी:
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ब्रेक टेस्टिंग: रोलर आधारित मशीन पर ब्रेक की क्षमता जांची जाएगी।
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प्रदूषण स्तर: निकास गैसों का सटीक विश्लेषण।
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हेडलाइट बीम: लाइट का फोकस और तीव्रता।
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सस्पेंशन और स्टीयरिंग: वाहन की सड़क पर पकड़ और नियंत्रण।
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स्पीड गवर्नर: क्या वाहन की गति सीमा निर्धारित मानकों के भीतर है।
- ट्रांसपोर्ट यूनियन का आक्रोश
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मुजफ्फरनगर के ट्रक ऑपरेटर्स और स्कूल बस एसोसिएशन ने इस फैसले को अव्यावहारिक बताया है। उनका कहना है, "जब तक मुजफ्फरनगर जनपद में अपना ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) स्थापित नहीं होता, तब तक मैनुअल व्यवस्था जारी रखनी चाहिए। दूर-दराज के जिलों में जाकर फिटनेस कराना उत्पीड़न के समान है।" मुजफ्फरनगर ट्रक ऑपरेटर्स और बस यूनियन का कहना है कि सरकार को जिले में सुविधा देने से पहले नियम थोपने नहीं चाहिए थे। यदि वाहन फिटनेस में फेल होता है, तो उसे सड़क पर चलाने की अनुमति नहीं होगी और भारी चालान का सामना करना पड़ेगा।
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