'गांधी परिवार' खुद को महात्मा गांधी की विरासत का उत्तराधिकारी बताने की कोशिश करता है'
शशांक मणि त्रिपाठी ने प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ इस्तेमाल की जा रही भाषा पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री एक सम्मानित और प्रतिष्ठित व्यक्ति हैं और देश में उनके लिए सम्मानजनक भाषा का इस्तेमाल होना चाहिए। किसी भी व्यक्ति के खिलाफ व्यक्तिगत तौर पर इस तरह के शब्दों का प्रयोग उचित नहीं है।
तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर निशाना साधते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि वे तुष्टिकरण की राजनीति की भाषा बोल रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस के सौ साल के इतिहास का जिक्र करते हुए कहा कि यह सच है कि महात्मा गांधी और सरदार पटेल के समय देश में बड़े सुधार हुए, लेकिन नेहरू परिवार ने पश्चिमी जीवनशैली और सोच को अपनाया, जो बाद में कांग्रेस की पहचान बन गई। वहीं, कांग्रेस सांसद उज्ज्वल रमण सिंह ने लोकसभा की कार्यवाही को लेकर भाजपा पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि लोकसभा में सरकार जवाब नहीं दे रही है और जिस तरह से कार्यवाही चलाई जा रही है, क्या देश इसे माफ करेगा?
उन्होंने आरोप लगाया कि सदन का पूरा समय केवल इसलिए बर्बाद किया जा रहा है ताकि नेता प्रतिपक्ष और पूरी विपक्षी एकजुटता को बोलने से रोका जा सके। उन्होंने सवाल उठाया कि यह कैसी संसद है और संसदीय मर्यादा का क्या स्तर रह गया है। उज्ज्वल रमण सिंह ने कहा कि भाजपा संसद की गरिमा को कमजोर कर रही है और अपनी जिम्मेदारियों से भाग रही है।
कांग्रेस के योगदान का जिक्र करते हुए उज्ज्वल रमण सिंह ने कहा कि आजादी से पहले कांग्रेस की भूमिका को भुलाया नहीं जा सकता। यह इतिहास के हर पन्ने में दर्ज है और हमेशा याद रखा जाएगा। जिन लोगों ने देश के लिए बलिदान दिए, सुख-सुविधाएं छोड़ीं और कठोर जेल यातनाएं झेलीं, कांग्रेस उन्हें सम्मान देती रहेगी।
इस बीच तृणमूल कांग्रेस की सांसद शताब्दी रॉय ने ईवीएम को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि ईवीएम में कई तरह की गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि नाम गलत दिखते हैं और जब सॉफ्टवेयर डाउनलोड किया जाता है, तो उसमें दिखाई देने वाली जानकारी सही नहीं होती।
शताब्दी रॉय ने कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और पार्टी सांसद अभिषेक बनर्जी पहले दिन से कह रहे थे कि ईवीएम का सॉफ्टवेयर ठीक से काम नहीं कर रहा और इसमें कुछ रहस्यमयी गड़बड़ी है। उन्होंने दावा किया कि आज जो सामने आया है, उससे उनकी बात सही साबित हो गई है।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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