संभल में सपा के दो दिग्गजों के बीच 'गृहयुद्ध' शुरू: 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बर्क बनाम महमूद की 'जंग'; ममलूकुर्रहमान ने खुद को बताया उम्मीदवार, इकबाल बेटे को उतारने को तैयार
सोशल मीडिया पर 'तीखे कटाक्ष' की बौछार; डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क के निधन के बाद बनी 'नरमी' टूटने के कगार पर; अखिलेश यादव के सामने कड़ी चुनौती!
संभल। उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी का गढ़ माने जाने वाले संभल में 2027 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पार्टी के दो सबसे कद्दावर मुस्लिम नेताओं के बीच सियासी खींचतान फिर चरम पर पहुंच गई है। एक तरफ मौजूदा सांसद जियाउर्रहमान बर्क के पिता ममलूकुर्रहमान बर्क ने खुद को संभल विधानसभा सीट से सपा का आधिकारिक उम्मीदवार घोषित कर चुनाव लड़ने का एलान कर दिया है। वहीं, दूसरी ओर, संभल से वर्तमान सपा विधायक इकबाल महमूद इस बार खुद मैदान में न उतरकर अपने बेटे सुहेल इकबाल को टिकट दिलवाने की रणनीति में जुटे हैं। इन दोनों दिग्गजों के बयानों ने सोशल मीडिया पर उनके समर्थकों के बीच तीखा टकराव पैदा कर दिया है, जहाँ आरोप-प्रत्यारोप और कटाक्ष की बौछार हो रही है।
गुरुवार को ममलूकुर्रहमान बर्क ने अचानक मीडिया से बातचीत करते हुए सियासी गलियारों में हलचल मचा दी। उन्होंने सीधे शब्दों में कहा, "2027 के विधानसभा चुनाव के लिए संभल क्षेत्र से मैं खुद सपा से चुनाव लड़ूंगा। पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को भी इसकी जानकारी है।" अपनी
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दावेदारी को मजबूती देते हुए उन्होंने सात बार के विधायक इकबाल महमूद पर तीखा हमला बोला, "इकबाल महमूद से जनता नाराज है। उन्होंने संभल के लिए कुछ नहीं किया। अखिलेश जी को सारी जानकारी है। इस बार जनता हम पर भरोसा जता रही है।" सुहेल इकबाल के नाम पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने तंज कसा, "जनता क्या किसी को भी चुनाव लड़ा देगी?" उनका यह बयान आग की तरह फैल गया, जिससे दोनों खेमों के समर्थक आमने-सामने आ गए।
इकबाल महमूद का पलटवार: 'वादा' याद दिलाया, बेटे को उतारने की तैयारी
ममलूकुर्रहमान के बयान के तुरंत बाद विधायक इकबाल महमूद ने भी पलटवार किया। उन्होंने लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा, "हमने सांसद जियाउर्रहमान बर्क और उनके पिता ममलूकुर्रहमान बर्क के साथ जिम्मेदार लोगों के सामने वादा किया था कि हम एक-दूसरे का चुनाव लड़वाएंगे। हमने उनका चुनाव उनके हक में लड़ाया भी। अब सांसद जियाउर्रहमान ही अपने पिता के सवाल का जवाब दे सकते हैं। हमारा जो वादा है, फिलहाल हम उस पर ही यकीन करते हैं।" महमूद की यह टिप्पणी स्पष्ट संकेत देती है कि वे खुद मैदान में न उतरकर बेटे सुहेल इकबाल को संभल से उतारने की रणनीति बना रहे हैं।
दशकों पुरानी अदावत और अखिलेश की चुनौती
संभल की सियासत में बर्क और महमूद परिवारों की अदावत दशकों पुरानी है। सपा के संस्थापक मुलायम सिंह यादव भी इन दोनों धड़ों को पूरी तरह नहीं जोड़ सके थे। सियासी जानकारों के मुताबिक, मुलायम जी के दबाव में ही एक बार डॉ. बर्क और इकबाल महमूद एक मंच पर दिखे थे, लेकिन उसके बाद भी सहयोग के बजाय विरोध के कई उदाहरण सामने आए।
डॉ. शफीकुर्रहमान बर्क के निधन के बाद अखिलेश यादव ने संभल दौरे पर उनकी विरासत का हवाला देकर जियाउर्रहमान को लोकसभा का टिकट दिया था। उस गमगीन माहौल में दोनों परिवारों ने एक-दूसरे के चुनाव में विरोध न करने पर सहमति जताई थी, जिससे पुरानी तल्खियां कुछ कम हुई थीं। लेकिन अब 2027 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यह 'नरमी' पूरी तरह टूटने के कगार पर है।
सियासी विश्लेषकों का मानना है कि अखिलेश यादव को इस पुरानी अदावत को सुलझाने के लिए जल्द हस्तक्षेप करना होगा। यदि दोनों धड़े अपने रुख पर कायम रहे, तो संभल में सपा का मजबूत वोट बैंक बँट सकता है, जिससे पार्टी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है। पूरे प्रदेश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि अखिलेश यादव इस चुनौती से कैसे निपटेंगे।
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लेखक के बारे में
अभिषेक भारद्वाज एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें 11 वर्षों से मुरादाबाद मंडल की पत्रकारिता का व्यापक अनुभव है। वे मुरादाबाद के प्रतिष्ठित एसएस न्यूज़ चैनल में संपादकीय प्रभारी जैसे महत्वपूर्ण पद पर कार्य कर चुके हैं। मुरादाबाद की राजनीतिक, सामाजिक और स्थानीय खबरों पर उनकी गहरी पकड़ है। वर्तमान में वे रॉयल बुलेटिन के मुरादाबाद जिला प्रभारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

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