ग्रेटर नोएडा: शाहबेरी में शत्रु संपत्ति पर बने अवैध साम्राज्य पर चला प्राधिकरण का चाबुक; नौ दुकानें की गईं सील
बिना नक्शा पास कराए सरकारी जमीन पर किया गया था निर्माण; 17 दिनों में प्राधिकरण की यह 7वीं बड़ी कार्रवाई; एसीईओ की चेतावनी- "अवैध कब्जेदारों को बख्शा नहीं जाएगा"
ग्रेटर नोएडा। चर्चित ग्राम शाहबेरी में अवैध निर्माण के खिलाफ ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने एक बार फिर सख्त रुख अख्तियार किया है। शनिवार को प्राधिकरण की टीम ने शत्रु संपत्ति पर अवैध रूप से निर्मित नौ दुकानों को सील करने की बड़ी कार्रवाई की। इस अचानक हुई कार्रवाई से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। हालांकि, स्थानीय दुकानदारों ने आरोप लगाया कि उन्हें बिना किसी पूर्व सूचना के कार्रवाई का सामना करना पड़ा है, लेकिन प्रशासन ने इसे कानून सम्मत कदम बताया है।
सीईओ के निर्देश पर वर्क सर्किल-1 ने की कार्रवाई
प्राधिकरण के एसीईओ सुमित यादव ने बताया कि सीईओ एनजी रवि कुमार के निर्देश पर परियोजना विभाग के वर्क सर्किल-1 के प्रभारी प्रभात शंकर के नेतृत्व में टीम ने शाहबेरी में शत्रु संपत्ति पर किए गए कब्जों को चिन्हित कर दुकानों को सील किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिसूचित क्षेत्र में सरकारी जमीन पर कब्जा करना या बिना नक्शा पास कराए निर्माण करना कानूनन अपराध है। प्राधिकरण पुलिस और जिला प्रशासन के साथ मिलकर ऐसी जमीनों को मुक्त कराने के लिए अभियान जारी रखेगा।
ये भी पढ़ें हम आपको निकालने में असमर्थ: अमेरिकी दूतावास ने इज़रायल में फंसे अपने नागरिकों को दी चेतावनी17 दिनों में 7 बड़ी कार्रवाइयां: प्राधिकरण का 'क्लीन अप' अभियान
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण पिछले कुछ दिनों से अतिक्रमणकारियों के खिलाफ बेहद आक्रामक नजर आ रहा है। पिछले 17 दिनों में यह सातवीं बड़ी कार्रवाई है:
20 जनवरी: भनौता में 11,340 वर्ग मीटर जमीन अतिक्रमण मुक्त।
28 जनवरी: हैबतपुर में 6,000 वर्ग मीटर जमीन मुक्त।
29 जनवरी: खेड़ा चौगानपुर में 8 टॉवरों के 100 से अधिक फ्लैट सील।
04 फरवरी: भनौता में दोबारा 10,000 वर्ग मीटर जमीन कब्जा मुक्त।
हाल ही में: रोहिल्लापुर में 18,000 वर्ग मीटर जमीन को प्राधिकरण ने अपने कब्जे में लिया।
जनता से अपील: कॉलोनाइजरों के चंगुल से बचें
एसीईओ ने आम जनता से अपील की है कि वे अपनी गाढ़ी कमाई अवैध कॉलोनाइजरों के चंगुल में फंसकर बर्बाद न करें। ग्रेटर नोएडा में कहीं भी जमीन या फ्लैट खरीदने से पहले प्राधिकरण के भूलेख विभाग से संपर्क कर उस संपत्ति की वैधता की जांच जरूर कर लें। उन्होंने चेतावनी दी कि अवैध निर्माण करने वालों और उन्हें बढ़ावा देने वालों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
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