दुनिया के 160 देशों में 1.08 लाख से ज्यादा अमेरिकी सैनिक तैनात, पेंटागन ने दी जानकारी
वॉशिंगटन। मध्यपूर्व में बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका ने सैन्य अभियानों को व्यापक रूप दे दिया है। इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि वर्तमान में 108,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक दुनिया के 160 देशों में तैनात या अग्रिम रूप से मौजूद हैं। यह तैनाती ऐसे समय में है, जब अमेरिका, ईरान के साथ जारी संघर्ष का सामना कर रहा है और चीन व रूस से बढ़ते सुरक्षा खतरों से भी निपट रहा है। पेंटागन के शीर्ष अधिकारियों ने बुधवार (स्थानीय समय) को सीनेट सशस्त्र सेवा उपसमिति ऑन रेडीनेस के समक्ष गवाही देते हुए कहा कि अमेरिकी सेना मध्य पूर्व में चल रहे सक्रिय सैन्य अभियानों के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर अपने अभियानों को बनाए रखने में सक्षम है।
अमेरिकी सेना के वाइस चीफ जनरल क्रिस्टोफर लानेव ने सीनेटरों से कहा कि अमेरिकी बल एक साथ कई क्षेत्रों में सक्रिय हैं और बदलते खतरों के बीच प्रतिरोधक क्षमता बनाए रखे हुए हैं। लानेव ने कहा, “आज 1,08,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक 160 देशों में तैनात या अग्रिम रूप से तैनात हैं जो पश्चिमी गोलार्ध में हमारे हितों की सुरक्षा कर रहे हैं।" लानेव ने कहा कि मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिक इस समय ईरान और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ जारी संघर्ष के बीच जटिल और खतरनाक माहौल में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "वे मिसाइलों और ड्रोन को रोकने वाली अमेरिकी सेना और साझेदारों का बचाव और जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर की रक्षा कर रहे हैं।" लानेव ने कहा कि अमेरिकी सैनिक खतरों का तेजी से जवाब देने के लिए इंटेलिजेंस और जॉइंट फायर के साथ सहयोग करते हुए थिएटर में फ्यूल, गोला-बारूद और मेडिकल सपोर्ट पहुंचाना जारी रखे हुए हैं। नौसेना के ऑपरेशंस के वाइस चीफ एडमिरल जेम्स किल्बी ने सांसदों को बताया कि पिछले साल अमेरिकी नेवी ने कई सैन्य मिशन चलाए और संयुक्त बलों को समर्थन दिया। नौसेना ने दुश्मनों के खिलाफ हमले किए और मध्य पूर्व में अपने सहयोगियों की सुरक्षा भी की। अमेरिकी नेवी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में लगातार सक्रिय है।
यहां वह चीन की बढ़ती गतिविधियों पर नजर रख रही है और अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर काम कर रही है। किल्बी ने बताया कि नेवी अपनी तैयारी मजबूत करने के लिए जहाजों की मरम्मत में हो रही देरी कम कर रही है और शिपयार्ड को आधुनिक बना रही है। साथ ही वह इस लक्ष्य की ओर बढ़ रही है कि उसके 80 प्रतिशत युद्ध के लिए तैयार जहाज, विमान और पनडुब्बियां हमेशा तैनाती के लिए तैयार रहें। मरीन कॉर्प्स के अधिकारियों ने कहा कि उनकी सेना दुनिया के किसी भी हिस्से में जल्दी तैनात होने के लिए तैयार रहती है, खासकर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में, जहां चीन के साथ तनाव बढ़ रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मरीन कॉर्प्स वैश्विक स्तर पर तुरंत प्रतिक्रिया देने वाली सेना है और हिंद-प्रशांत में लगातार सक्रिय भूमिका निभा रही है। एयर फोर्स के वाइस चीफ ऑफ स्टाफ जनरल जेम्स लामोंटेग्ने ने कहा कि वायुसेना अपने विमानों को आधुनिक बना रही है और नए पायलटों को प्रशिक्षण दे रही है।
उन्होंने बताया कि वायुसेना का मुख्य काम विमानों को उड़ाने और उन्हें अच्छी स्थिति में रखना है, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत कार्रवाई की जा सके। उन्होंने कहा कि एयर फोर्स हर साल करीब 1,500 नए पायलटों को ट्रेनिंग दे रही है और बी-21 बॉम्बर जैसे नए विमान और आधुनिक लड़ाकू प्रणालियां भी विकसित कर रही है। स्पेस फोर्स के अधिकारी जनरल माइकल गुएटलीन ने कहा कि आधुनिक युद्ध में अंतरिक्ष की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण हो गई है। उन्होंने बताया कि हाल ही में मिसाइल चेतावनी, नेविगेशन और अंतरिक्ष निगरानी के लिए नए उपग्रह भी लॉन्च किए गए हैं। हालांकि गवर्नमेंट अकाउंटेबिलिटी ऑफिस (जीएओ) ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी सेना को अभी भी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। जीएओ अधिकारी डायना मौरर ने कहा कि अमेरिका के पास दुनिया की सबसे मजबूत सेना है, लेकिन पुराने हथियार, मरम्मत में देरी और स्पेयर पार्ट्स की कमी जैसी समस्याएं तैयारी को प्रभावित कर रही हैं।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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