वोटर लिस्ट से नाम कटवाने की अफवाह फैलाने वालों की अब खैर नहीं: बिजनौर डीएम जसजीत कौर ने दी सख्त चेतावनी, होगी दंडात्मक कार्यवाही
फॉर्म-7 को लेकर भ्रम फैलाना और निर्वाचन अधिकारियों से दुर्व्यवहार पड़ेगा भारी; जिलाधिकारी बोलीं- "पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष है एसआईआर की प्रक्रिया"
बिजनौर। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के अनुपालन में जिला प्रशासन ने मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान अफवाहें फैलाने वाले और सरकारी कार्य में बाधा डालने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जिलाधिकारी श्रीमती जसजीत कौर ने स्पष्ट किया है कि फॉर्म-7 (नाम हटाने हेतु आवेदन) के माध्यम से मतदाताओं के नाम काटे जाने के संबंध में फैलाई जा रही भ्रांतियां पूरी तरह निराधार और बेबुनियाद हैं। प्रशासन ऐसी झूठी अफवाहें फैलाने वालों और बीएलओ या अन्य अधिकारियों को डराने-धमकाने वालों के विरुद्ध कड़ी दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित करेगा।
निर्धारित प्रक्रिया के बिना नहीं कटेगा किसी का नाम
जिलाधिकारी ने फॉर्म-7 की प्रक्रिया को स्पष्ट करते हुए बताया कि मतदाता सूची से नाम केवल मृत्यु, स्थायी अनुपस्थिति, दोहरा पंजीकरण या भारतीय नागरिकता न होने जैसी ठोस परिस्थितियों में ही हटाया जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि नाम हटाने की प्रक्रिया बेहद पारदर्शी है, जिसमें संबंधित बीएलओ द्वारा पोर्टल पर अंकन के बाद इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) द्वारा आपत्तिकर्ता और संबंधित मतदाता—दोनों को लिखित नोटिस जारी किया जाता है। इसके बाद मौका मुआयना और उचित सुनवाई के उपरांत ही अंतिम निर्णय लिया जाता है।
फॉर्म-7 भरने के लिए कड़े हैं नियम
ये भी पढ़ें ईरान-इजरायल संघर्ष: रूस का अमेरिका पर बड़ा आरोप, 'ईरान में तख्तापलट करना चाहती है अमेरिकी सरकार'प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि फॉर्म-7 जमा करने का अधिकार केवल उसी व्यक्ति को है, जिसका नाम उसी विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में पहले से दर्ज हो। आपत्तिकर्ता को अपना नाम, वोटर आईडी नंबर और आपत्ति का स्पष्ट कारण देना अनिवार्य है। किसी भी फर्जीवाड़े को रोकने के लिए चुनाव आयोग प्रतिदिन फॉर्म-7 का डेटा अपने पोर्टल पर जारी करता है और जिले की वेबसाइट पर भी इसे अपलोड किया जाता है।
सरकारी कार्य में बाधा डालने पर मिलेगी सजा
जिलाधिकारी ने सख्त लहजे में कहा कि मतदान केंद्रों या कार्यालयों पर जाकर सरकारी अभिलेखों को नष्ट करने, बीएलओ, वीआरसी ऑपरेटर या तहसील स्तर के अधिकारियों को डराने-धमकाने और उनके कार्य में बाधा डालने वाले कृत्यों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। राजनीतिक दलों को भी हर सप्ताह प्रपत्र 6, 6ए, 7 और 8 की संख्या बैठक के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे। जिला प्रशासन निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण और निष्पक्ष कार्य के लिए प्रतिबद्ध है।
अफवाहों से बचें: जानें क्या है फॉर्म-7 की असली प्रक्रिया और प्रशासन की तैयारी
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए तकनीक और कानून का कड़ाई से पालन किया जा रहा है। खबर के साथ ये बिंदु भी पाठकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं:
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राजनीतिक दलों की भागीदारी: प्रपत्र 6, 6ए, 7 और 8 की साप्ताहिक रिपोर्ट जिले के सभी राजनीतिक दलों को बैठक के माध्यम से नियमित रूप से उपलब्ध कराई जाती है।
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डिजिटल पारदर्शिता: प्रतिदिन प्राप्त होने वाले आवेदनों और आपत्तियों की सूची जिले की आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड की जाती है, जिसे कोई भी नागरिक देख सकता है।
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अधिकारियों को संरक्षण: मतदान केंद्रों या वीआरसी (VRC) केंद्रों पर जाकर बीएलओ, ऑपरेटर या तहसील स्तरीय अधिकारियों को डराना-धमकाना या सरकारी अभिलेखों के साथ छेड़छाड़ करना गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आएगा।
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जांच के बिना कार्रवाई नहीं: किसी के भी कहने मात्र से नाम नहीं काटा जाएगा। नोटिस जारी करने और मौका मुआयना (Physical Verification) के बाद ही ईआरओ (ERO) अंतिम फैसला लेंगे।
जिलाधिकारी का संदेश: "प्रशासन निष्पक्ष चुनाव और त्रुटिहीन मतदाता सूची के लिए प्रतिबद्ध है। किसी भी प्रकार की अराजकता फैलाने वाले तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा।"
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पत्रकारिता के क्षेत्र में जब भी निष्पक्षता और गहरे अनुभव की बात आती है, तो बिजनौर के वरिष्ठ पत्रकार पंकज भारद्वाज का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। पिछले कई दशकों से सामाजिक सरोकारों और जनहित की खबरों को अपनी कलम से धार देने वाले पंकज भारद्वाज वर्तमान में 'पब्लिक इमोशन' नामक दैनिक समाचार पत्र का सफल संपादन और प्रकाशन कर रहे हैं।
रॉयल बुलेटिन के साथ अटूट रिश्ता -पंकज भारद्वाज का रॉयल बुलेटिन के साथ एक लंबा और ऐतिहासिक सफर रहा है। वे न केवल इसके विकास के साक्षी रहे हैं, बल्कि लंबे समय तक संस्थान के साथ जुड़कर उन्होंने पत्रकारिता के उच्च मानकों को स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके इसी अनुभव और समर्पण को देखते हुए वर्तमान में वे रॉयल बुलेटिन के 'संपादकीय सलाहकार' के रूप में संस्थान का सहयोग कर रहे हैं।

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