“एक फोन कॉल ने बदल दी पूरी कहानी! AI से बनाई फर्जी अश्लील तस्वीरें, रिश्तेदारों को भेजने की धमकी देकर लूटे 4 लाख”
ग्वालियर के झांसी रोड इलाके में साइबर ठगी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने AI के गलत इस्तेमाल को लेकर चिंता बढ़ा दी है। एक महिला को सस्ते ब्याज पर लोन देने का झांसा देकर साइबर अपराधियों ने पहले उसके मोबाइल की जानकारी हासिल की और बाद में कथित तौर पर उसकी तस्वीरों को AI की मदद से अश्लील रूप में मॉर्फ कर दिया। इसके बाद रिश्तेदारों और परिचितों को तस्वीरें भेजने की धमकी देकर महिला से अलग-अलग किश्तों में करीब 4 लाख रुपये वसूल लिए गए।
कम ब्याज वाले लोन का दिया झांसा
पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक, झांसी रोड निवासी पिंकी यादव के पास एक अनजान नंबर से फोन आया था। कॉल करने वाले ने उन्हें बेहद कम ब्याज दर पर लोन दिलाने का भरोसा दिया। शुरुआत में महिला ने लोन लेने से इनकार कर दिया, लेकिन इसके बाद कथित तौर पर साइबर ठगों ने उसे ब्लैकमेल करने का रास्ता अपनाया।मोबाइल की गैलरी और कॉन्टैक्ट लिस्ट तक पहुंच का दावा
पुलिस की शुरुआती जांच के अनुसार, ठगों ने किसी संदिग्ध लिंक, मालवेयर या स्पैम कॉल के जरिए महिला के मोबाइल की गैलरी और कॉन्टैक्ट लिस्ट तक पहुंच बनाई हो सकती है। इसके बाद उसके मोबाइल में मौजूद तस्वीरों और संपर्कों का इस्तेमाल उसे डराने के लिए किया गया। साइबर अपराधियों ने महिला को बताया कि उसकी तस्वीरों को AI की मदद से अश्लील फोटो और वीडियो में बदल दिया गया है।
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ठगों ने कथित तौर पर महिला को धमकाया कि अगर उसने पैसे नहीं दिए तो मॉर्फ की गई तस्वीरें उसके रिश्तेदारों, दोस्तों और परिचितों तक पहुंचा दी जाएंगी। इसके साथ ही परिचितों को फोन करने और तस्वीरें भेजने की धमकी देकर महिला पर लगातार दबाव बनाया गया। बदनामी के डर से वह अपराधियों की मांग पूरी करती रही।
डर के कारण करीब 4 लाख रुपये गंवाए
शिकायत के मुताबिक, लगातार मिल रही धमकियों के चलते महिला ने अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर की। साइबर ठगों की पैसों की मांग लगातार बढ़ती गई और आखिरकार महिला से करीब 4 लाख रुपये ठग लिए गए। रकम देने के बाद भी कथित तौर पर आरोपियों के फोन बंद नहीं हुए और वे आगे भी पैसे मांगते रहे।
साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत के बाद पुलिस ने शुरू की जांच
लगातार बढ़ती मांग और मानसिक दबाव से परेशान होकर महिला ने साइबर हेल्पलाइन और पुलिस से शिकायत की। मामले में पहले ई-जीरो एफआईआर दर्ज की गई और इसके बाद अज्ञात साइबर अपराधियों के खिलाफ धोखाधड़ी, ब्लैकमेलिंग और आईटी एक्ट की संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर जांच शुरू की गई।
पुलिस अब उन मोबाइल नंबरों, व्हाट्सऐप अकाउंट और बैंक खातों की जानकारी जुटा रही है, जिनका इस्तेमाल कथित तौर पर ठगी के लिए किया गया। जांच में सामने आया है कि रकम कई राज्यों से जुड़े बैंक खातों तक पहुंची, जबकि कुछ पे-वॉलेट के कनेक्शन दिल्ली और पश्चिम बंगाल से बताए जा रहे हैं।
AI मॉर्फिंग के जरिए ब्लैकमेलिंग बढ़ा रही चिंता
इस घटना ने यह भी दिखाया है कि साइबर अपराधी अब लोगों की निजी तस्वीरों और AI तकनीक का इस्तेमाल करके डर और बदनामी का दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं। किसी तस्वीर को डिजिटल तरीके से बदलकर उसका गलत इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसे मामलों में पीड़ित को डरकर लगातार पैसे देने के बजाय तुरंत साइबर पुलिस या आधिकारिक साइबर हेल्पलाइन से संपर्क करना चाहिए।
अनजान लिंक और ऐप से रहें बेहद सावधान
साइबर विशेषज्ञों की सलाह है कि किसी अनजान व्यक्ति के भेजे लिंक, APK फाइल या संदिग्ध ऐप को फोन में इंस्टॉल नहीं करना चाहिए। किसी भी थर्ड-पार्टी ऐप को फोटो गैलरी, कॉन्टैक्ट या अन्य निजी जानकारी की अनावश्यक अनुमति देना भी जोखिम भरा हो सकता है। लोन के नाम पर आने वाली संदिग्ध कॉल और मैसेज से भी सावधान रहना जरूरी है।
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