बाबा सिद्दीकी हत्याकांड के आरोपित को बॉम्बे हाई कोर्ट ने दी सशर्त जमानत
मुंबई। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी हत्याकांड मामले के पहले आरोपित आकाशदीप सिंह को सोमवार को बॉम्बे उच्च न्यायालय ने सशर्त जमानत दे दी है। उच्च न्यायालय ने कहा कि इस जमानत का असर अन्य आरोपितों पर नहीं पड़ेगा।
न्यायाधीश नीला गोखले की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान आरोपित के वकील ने कहा कि आकाशदीप के खिलाफ ठोस सबूत नहीं है। सिर्फ एक आरोपित के साथ कॉल रिकॉर्ड का जिक्र है और वह भी हत्या से काफी पहले का है, जिसके कारण आरोपित का इस वारदात से सीधा संबंध नहीं बनता है। इसके बाद उच्च न्यायालय ने अभियोजन पक्ष से साफ तौर पर पूछा कि आकाशदीप की भूमिका क्या थी और उसके खिलाफ कौन-सा पुख्ता सबूत मौजूद है। उपलब्ध दस्तावेज और दलीलों को देखने के बाद उच्च न्यायालय ने माना कि फिलहाल जमानत देने से जांच पर असर नहीं पड़ेगा और इसी आधार पर आरोपित को जमानत दी गई।
पीठ ने साफ कहा कि आरोपित को जमानत दी जा रही है, लेकिन इसका असर बाकी आरोपितों की जमानत याचिकाओं पर नहीं पड़ेगा। उच्च न्यायालय ने जमानत के साथ कुछ सख्त शर्तें भी लगाई हैं। इनके तहत आरोपित को हर दूसरे सोमवार को संबंधित पुलिस स्टेशन में हाजिरी लगानी होगी। इसके अलावा वह ट्रायल कोर्ट की इजाजत के बिना राज्य से बाहर नहीं जा सकेगा और उसे अपना पासपोर्ट भी जमा करना होगा।
पूर्व मंत्री बाबा सिद्दीकी को बांद्रा इलाके में 12 अक्टूबर, 2024 को गोली मार दी गई थी। बाबा सिद्दीकी की अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो गई थी। इस मामले में मुंबई पुलिस ने कुल 27 से ज्यादा आरोपितों को गिरफ्तार किया था। 21 साल के आकाशदीप सिंह को पंजाब से गिरफ्तार किया गया था और वह इस मामले में 24वां गिरफ्तार आरोपित था।
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लेखक के बारे में
मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली अर्चना सिंह वर्तमान में 'रॉयल बुलेटिन' में ऑनलाइन न्यूज एडिटर के रूप में कार्य कर रही हैं। उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों से अधिक का गहरा अनुभव है। नोएडा के प्रतिष्ठित 'जागरण इंस्टीट्यूट' से इलेक्ट्रॉनिक एवं प्रिंट मीडिया में मास्टर्स की डिग्री प्राप्त अर्चना सिंह ने अपने करियर की शुरुआत 2013 में पुलिस पत्रिका 'पीसमेकर' से की थी। इसके उपरांत उन्होंने 'लाइव इंडिया टीवी' और 'देशबंधु' जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दीं।
वर्ष 2017 से 'रॉयल बुलेटिन' परिवार का अभिन्न अंग रहते हुए, वे राजनीति, अपराध और उत्तर प्रदेश के सामाजिक-सांस्कृतिक मुद्दों पर प्रखरता से लिख रही हैं। गोरखपुर की मिट्टी से जुड़े होने के कारण पूर्वांचल और पूरे उत्तर प्रदेश की राजनीति पर उनकी विशेष पकड़ है।

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